ज़ीरो बटा सन्नाटा का जलवा

 ज़ीरो बटा सन्नाटा का जलवा

ऋतु रानी,शोधार्थी एवं थिएटर आर्टिस्ट

ज़ीरो बटा सन्नाटा


दिनांक 7 मई 2022 को रेलवे क्लब हाउस, कनॉट प्लेस, दिल्ली में परिवर्तन साहित्यिक मंच एवं साहित्य संचय के संयुक्त प्रयास से कवि , लेखक तेज प्रताप नारायण के व्यंग संग्रह ‘जीरो बता सन्नाटा’ पुस्तक पर चर्चा आयोजित की गई| तेज प्रताप नारायण हिंदी के ऐसे समकालीन रचनाकार हैं जो अपने लेखन में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक विसंगतियों को उठाते हैं | ‘सूरज की नई किरण’, ‘अपने-अपने एवरेस्ट’, ‘सीमाओं के पार’ और ‘किंतु-परंतु’ उनके कविता संग्रह हैं तथा ‘कितने रंग जिंदगी के’ और ‘एयरपोर्ट पर एक रात’ कहानी संग्रह | ‘टेक्निकल लव’ उनका पहला उपन्यास है तथा ‘जिंदगी है… हैंडल हो जाएगी’ एक साझा उपन्यास| अब हाल ही में साहित्य संचय, दिल्ली ने उनके नये व्यंग्य संग्रह ‘जीरो बता सन्नाटा’ को प्रकाशित किया है जिसका साहित्य जगत में खुलकर स्वागत हो रहा है |
पुस्तक चर्चा के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं व्यंग्यकार डॉ. रवीन्द्र कुमार सम्मिलित हुए और अपने अध्यक्षीय भाषण में लेखक को बधाई देते हुए उन्होंने पुस्तक की बारीकियों पर प्रकाश डाला | साथ ही इस चर्चा में चार अन्य वक्ता भी शामिल हुए| इसमें निदेशक, भारत सरकार तथा लेखक, आलोचक जय प्रकाश फकीर, प्रभाष जोशी के जीवनीकार तथा दयाल सिंह कॉलेज (डीयू) में हिंदी के सहायक प्रोफेसर डॉ. रामाशंकर कुशवाहा, कवि और आलोचक डॉ. संतोष पटेल, तथा जामिया मिलिया इस्लामिया के शोधार्थी एवं युवा लेखक सुशील द्विवेदी रहे| सभी वक्ताओं, मुख्य अतिथि आदि को शाल भेंट की गई |
जय प्रकाश फकीर ने दैनिक जीवन से उदाहरण देकर व्यंग को समझाने की कोशिश की | साथ ही उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उसमें निहित अन्दुरुनी भाव बोध और भाषिक पक्ष को समझने के लिए आलोचना के गढ़े गए प्रतिमानों से ऊपर उठाकर देने की मांग करती हैं | वह पुस्तक के मिथकीय व्यंग के सहारे माहौल को थोडा हास्यात्मक भी बनाते गए| वही डॉ. कुशवाहा पुस्तक के विषयवस्तु के सन्दर्भ में बात करते हुए उसकी भाषा में लोक की अनुभूति को इंगित करते हैं| साथ ही वह कहते हैं कि पुस्तक में लेखक विभिन्न सामाजिक मुद्दों को उठाते हैं इसलिए उन्हें मुद्दों के लेखक भी कहना गलत न होगा | डॉ. संतोष पटेल शिक्षण व्यवस्था आदि के उदाहरणों से व्यंग्य की पेनी धार और शक्ति को समझाते हुए पुस्तक में निहित व्यंग्यात्मता पर प्रकाश डालते हैं | सुशील द्विवेदी ने व्यंग की विभिन्न विधाओं में उपस्थिति को हमारे समक्ष रखा और ‘जीरो बता सन्नाटा’ की व्यंग के क्षेत्र में एक जोरदार पहल का स्वागत किया |
समकालीन परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक बड़ी प्रासंगिक लगती है क्योंकि इसमें लेखक ने जीवन के लगभग हर पक्ष पर लेखनी चलाई है । वह सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता की बात करते हैं। उन्हें धर्मान्धता में, अंधविश्वास में, जातिवाद में, अतिवाद में जरा भी विश्वास नहीं है । इसलिए लगातार अपने लेखन से समाज को चेताने का काम कर रहे हैं । पुस्तक जीरो बता सन्नाटा कुछ 65 छोटे बड़े व्यंग लेखों का संग्रह है | इस कार्यक्रम की संचालिका भारती प्रवीन रही जिनके बड़े ही रोचक और काव्यात्मक संचालन ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए | कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद हेतु मंच पर ऋतु रानी रही | कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शुरू से अंत तक हॉल दर्शकों से भरा रहा रहा ।

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