जाति न पूछो साधु की

 जाति न पूछो साधु की

जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान
मोल करो तरवार की,पड़ा रहन दो म्यान ।

यह बात कबीर जी ने कही थी ।उन्होंने न कभी अपनी जाति बताई और न जाति छुपाई लेकिन लोगों ने उनकी जाति खोज कर बता दी कि वह फलाना जाति की विधवा स्त्री के पेट से पैदा हुए थे क्योंकि फलाना जाति के लोग बड़े ऊँचे होते हैं और कबीर जैसे लोग फलाना जाति में ही पैदा हो सकते हैं ।

भारतीय लोग बड़े ही खोजी हैं ,बहुत खुशी होती है यह सुनकर । लेकिन रुकिये रुकिये ,यहाँ कोई वैज्ञानिक या पुरातात्विक खोज की बात नहीं कर रहा हूँ ,बल्कि उस खोज की बात जिसके लिए कबीर ने मना किया था ।
खोजी भी इतने कि जितने भी महान लोग हुए हैं सबको इन्होंने फलाना जाति से जोड़ दिया ,अगर इस जन्म में नहीं जोड़ पाये तो पिछले जन्म से जोड़ने लगे ।अकबर हो,मीरा बाई हों या रैदास सबको कैसे न कैसे उस फलानी जाति से जोड़ दिया जाता रहा ।

वैसे इस देश मे किसी गाँव में हों ,बस में बैठे हों या ट्रैन में ।अगर बातचीत होने लगे और किसी के नाम से उसकी जाति न स्पष्ट हो रही है तो जाति खोजो अभियान शुरू हो जाता है ।किसी परीक्षा का परिणाम आया हो या चुनाव के परिणाम आये हों ।सफल लोगों की जाति के आधार पर सूची बनकर सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने लगती है ।इतनी खोज ,अगर लोग अपने सामान्य जीवन में करें तो हो सकता है लोगों का विवेक बहुत विकसित हो जाये ,लोगों के चक्षु खुल जायें ? लेकिन जाति खोजना, यहाँ डीएनए के अन्वेषण से कम नहीं है ।
जैसे मनुष्य डीएनए की सीढ़ी चढ़ता चढ़ता आज तक पहुँचा है,बिल्कुल वैसे ही खोजी लोग करते हैं,खोज- खोज करते जाति खोज लेते हैं । एक्चुअली जाति भारतीय समाज की परकाष्ठा है और भारतीय दर्शन की इसमें अद्भुत आस्था है । क्योंकि जाति ही विकास का बहुतों के लिए अच्छा रास्ता है ।जातिगत पेशे ,बढ़ई का बेटा बढ़ई ,दर्जी का दर्ज़ी ,इंसान का वश नहीं चलता बस चलती है जाति की मर्ज़ी । जाति ही यहाँ महान बनाती है ,जाति ही धनवान बनाती है और जाति ही इंसान बनाती है ।

अगर आपके नाम में सरनेम है तो ठीक , नहीं तो पूछताछ के फावड़े से जाति खोज ली जाती है ,शायद लोगों का दिमाग़ इतना पुरातत्विक है कि खोद कर जाति निकालते रहते हैं ,जैसे आजकल जहाँ खोदो वहाँ बुद्ध निकलते हैं और बुद्ध की मूर्तियाँ कहीं सिर से टूटी हैं तो कहीं पैरों से ।मतलब पहले के धार्मिक आतताइयों ने इस तरह बुद्ध की मूर्तियों को तोड़कर दो बातें की ।सिर तोड़ा और झूठी कहानियों के हथौड़े से दिमाग़ को कुंद किया और पैरों को तोड़ कर रास्ते बंद किये लेकिन बुद्ध हवाई रास्ते से पूरे विश्व में छा गये और इस देश को विश्व गुरु बना गये जिसकी अब तक सब रोटी खा रहे हैं ।

आजकल बुद्ध की भी जाति खोजी जा रही है। भाई बुद्ध की जाति खोज कर उन्हें छोटा मत करें ,बुद्ध किसी जाति,धर्म,पंथ या देश से ऊपर हैं।बुद्ध सूर्य हैं जो शताब्दियों तक संसार को प्रकाशित करेंगे ।

हालाँकि आजकल जाति जानना थोड़ा ज़रूरी भी है ।मसलन कि कार्यपालिका, न्यायपालिका,विधायिका ,पत्रकारिता और साहित्य में किस जाति का कितना प्रतिनिधित्व है । अगर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो उन जाति के लोगों को वहाँ लाने के लिये विशेष प्रयास होने चाहिये। असंतुलन की स्थिति में देश की सेंटर ऑफ ग्रेविटी अपने सेन्टर से खिसकी हुई है और इसे बहुत दिन तक नहीं खिसकाये रखना चाहिये।

इसलिये भैय्या !!

जाति न पूछो साधु की, करो उनका सम्मान
सबको उनका हक़ देकर थोड़ा बनो महान ।

जय बोलो अंबेडकरवादी की
जय बोलो महात्मा गाँधी की ,
इस देश में समानता कब होई
जागेगी कब जनता सोई ?

तेज प्रताप नारायण

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