निंदा रस

 निंदा रस

लेखक : तेज प्रताप नारायण

लेखक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं और कई सारे पुरुस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं ।
Email: tej.pratap.n2002@gmail.com

निंदक नियरे राखिए कबीर दास जी के एक दोहे का अंश है जिसको अक्सर कई लोग उद्धृत करते हुए निंदा को महान गुण मान लेते हैं , उन्हें लगता है निंदा करना सर्वोत्कृष्ट कर्म है और जो निंदा करवाएगा वही ज़िंदा रहेगा । निंदा एक टॉनिक के समान है,कितने सारे लोग इसके बिना ज़िंदा नहीं रह सकते हैं । मेरा तो खाना ही तब तक नहीं पचता जब तक चार छह लोगों की निंदा न कर लूं । कई बार तो बिना निंदा किए पेट ही नहीं भरता है। जैसे मिठाई की क्रेविंग होती है कुछ लोगों में, वैसे ही मेरे अंदर निंदा करने की क्रेविंग होती है।

कई बार तो निंदा पार्टियां भी आयोजित की जाती हैं और उसमें दिल का भड़ास निकाला जाता है । किटी पार्टीज को भी निंदा पार्टी ही कह सकते हैं अगर बहुएं किटी पार्टी आयोजित करती है तो वे सास की निंदा पानी पी पी के करती हैं ।कुछ पार्टियों में पानी का स्थान रेड वाइन या वोडका भी ले लेता है । समय और स्थान बदलता है तो ज़िंदगी के पैमाने भी बदलते हैं । गांव में देशी दारू की दुकान पर पैमाने छलकते थे तो वहीं शहरो में वाइन की शॉप या नाईट क्लब्स में अंग्रेजी शराब को होठों से लगाकर ज़िंदगी रंगीन की जाती है ।

बहुओं की तरह सासू लोग भी किट्टी या किटी पार्टी में बहू निंदा के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती हैं । पति और पत्नी संघ में भी लोग पत्नियों या पतियों की निंदा करते होंगे ? वैसे पत्नी निंदा तो महापाप की श्रेणी में आना चाहिए ।
ऑफ़िस टाइम में भी अधिकारी ,कर्मचारी खाना खा खाकर निंदा करने से बाज नहीं आते हैं । निंदा से एनर्जी आती है और लंच के बाद सब अच्छे से काम कर पाते हैं।

दरअसल निंदा और नींद में प्यार मुहब्बत है , जैसे लैला मजनू में प्यार था ।जब तक निंदा न कीजिए तब तक नींद नहीं आती है ।इसलिए पानी पी पी के निंदा कीजिए ।पानी पी पी के ,दारू पी पी के निंदा कीजिए । बस निंदा कीजिए । मेरे गांव में तो कई सारे निंदा प्वाइंट बन गए हैं । इन पॉइंट्स पर लोग निंदा करने में दूसरों का इतना ध्यान रखते हैं जिनका शब्दों में वर्णन नहीं कर सकते हैं।संयुक्त परिवारों में भी निंदा करने के तमाम तौर तरीके ईजाद कर लिए जाते हैं ।

निंदा रस में जो रस है वह और किसी रस में नहीं हैं ।निंदा रस फ्री मिलता है । यदि कोई आपकी निंदा न करे या आप किसी की निंदा न कर पाएं तो खुद की निंदा कर लीजिए । एक तीर से दो शिकार । निंदा भी हो गई और नींद भी आ गई । अगर आपने किसी की निंदा न की तो आपका जीवन व्यर्थ माना जायेगा । जीवन में उपलब्धि के लिए ज़रूरी है निंदा किया जाए ।जितनी ज़्यादा निंदा,उतना बड़ी उपलब्धि ।यदि कोई निंदा नहीं कर रहा है तो वह कतई सामान्य व्यक्ति नहीं कहा जा सकता है ।

मेरी तो हिंदी के ठेकेदारों से करबद्ध प्रार्थना है कि निंदा रस को एक रस के रूप में साहित्य में जगह दें जिससे ऐसे लोग जो निंदा रस के नायक हैं उन्हे साहित्य में सही जगह हासिल हो सके । साहित्यिक निदा जब मंचों से होगी तो कबीर की यह युक्ति भी सार्थक हो जायेगी।

मनोवैज्ञानिकों या मनोचिकित्सकों को भी निंदा थेरेपी का इस्तेमाल करना चाहिए ।किसी न किसी धर्म को भी औपचारिक रूप से निंदा को एक देव या पैगंबर के रूप में मान लेना चाहिए ।निंदा अनादि और अनंत है ।महाभारत या रामायण की ही बात ले लीजिए ।मामा शकुनि ने किस तरह निंदा करके कौरवों को पांडवों के खिलाफ़ भड़का दिया और मंथरा ने कैकेई के कान भरकर उनके मन को बदला था ?यह सब निंदा का परिणाम ही था ।लोग नाहक ही शकुनि मामा या मंथरा ताई को बदनाम करते हैं। मैं तो संयुक्त राष्ट्र संघ से गुजारिश करूंगा कि किसी एक दिन को निंदा दिवस के रूप में घोषित कर दे ।निंदा संस्कृति को सही स्थान दिलाने के लिए इसकी घोर आवश्यकता है ।

हर जागरूक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह निंदा करे और करवाए ,इससे रहने की समस्या का भी समाधान हो सकता है क्योंकि हर निंदक को नियरे रखने के लिए आंगन में एक कुटी छवानी पड़ेगी और आवास की समस्या चुटकियों में हल हो जायेगी।

निंदा देश को एक करने में भी एक कामयाब हथियार हो सकता है ।जिस तरह दारू का सेवन करने से लोग हर तरह का भेदभाव भूलकर बस पैमाने को देखते हैं ।उसी तरह निंदा भी हर तरह के भेदभाव को खत्म करने में एक कारगर हथियार साबित हो सकता है । निंदा करना हर किसी का धर्म होना चाहिए । इसके लिए जगह जगह निंदा क्लब बनाए जाने चाहिए जिससे लोग एक साथ बैठकर निंदा कर सकें और रिलेक्स महसूस कर सकें । व्हाट्सएप पर निंदा ग्रुप बनाए जाने चाहिए ।

तो आइए सब लोग मिलकर निंदा करें ,निंदा रस का आनंद लें ।बस इतना सा डर है कि कहीं निंदा टैक्स न लग जाए ?

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