परिवर्तन फेस्ट का आयोजन

 परिवर्तन फेस्ट का आयोजन

23 और 24 जनवरी को परिवर्तन साहित्यिक मंच द्वारा परिवर्तन फेस्ट का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न तरह के आयोजन किए गए। इसकी शुरुआत  पूर्व आई ए एस अरुण कुमार सिन्हा सीनियर पत्रकार राना सिद्दीकी ज़मान और वरिष्ठ भोजपुरी एवं हिंदी साहित्यकार डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना के उद्बोधन द्वारा हुआ ।अरुण कुमार सिन्हा ने ‘इंडिविजुअल सोशल रिस्पांसिबिलिटी’ की बात कही जिसके तहत मनुष्य का मनुष्य के प्रति करुणा संवेदना और सेवा भाव पर जोर दिया जाना है ।राना सिद्दीकी ज़मान ने ‘सेव द आर्टिस्ट मूवमेंट ‘ की ज़रूरत बताया वहीं डॉक्टर मस्ताना ने बुद्ध के विचारों  पर जोर दिया । उन्होंने कहा की बुद्ध के मार्ग पर चल कर ही मानवता का कल्याण संभव है।

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ज्योति कुमारी ने विधि साक्षरता अभियान के तहत जनता के अधिकारों के बारे में बात की । प्रख्यात लेखक सुभाष चंद्र कुशवाहा ने कृषि और किसान विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत को गाँव और किसान ही बचाएगा ।भोजपुरी जन जागरण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष पटेल ने भोजपुरी भाषा आंदोलन के बारे में विस्तार से चर्चा की ।पहले दिन के कार्यक्रमों में बच्चों का कविता पाठ विशेष आकर्षण का विषय रहा जिसे नन्हे-मुन्ने बच्चों ने सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया। बहुजन ट्रांसजेंडर महिला साई बोरोथू ने ट्रांसजेंडर के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव लाने की बात कही  और कहा कि ट्रांसजेंडर भी एक सामान्य मनुष्य हैं और उन्हें अलग नहीं समझा जाना चाहिए । लोक कला नौटंकी पर बात करते हुए युवा किस्सागो और अभिनेता प्रदीप कुमार ने नौटंकी कला में प्रवेश कर गई अश्लीलता को हटाने की बात कही और नौटंकी कला को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत बताया।

दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत ‘ तंदुरुस्ती हजार नियामत कार्यक्रम’ से हुई जिसमें केजीएमसी ,लखनऊ के डॉ अमित कुमार नायक ने स्वस्थ रहने के मूलभूत नियम श्रोताओं के समक्ष रखें ।’ परवरिश’ कार्यक्रम में साइकेट्रिस्ट डॉक्टर सूर्यभान मिश्रा ने बच्चों की परवरिश से संबंधित सलाह दिया ।
भिखारी ठाकुर पर शोध करने वाले डॉक्टर जैनेंद्र दोस्त ने भिखारी ठाकुर के जीवन से संबंधित कई पक्षों पर प्रकाश डाला । 30 हफ्तों से चलने वाला परिवर्तन का कार्यक्रम आग़ाज़ ए सुख़न भी श्रोताओं के आकर्षण का केंद्र रहा जिसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डॉ चंद्र देव यादव ,इंदौर की सीमा अहिरवार और लखनऊ की पूनम हिम्मत अद्वितीय ने भाग लिया । दूसरे दिन के कार्यक्रमों में सबसे खास रहा,’ कहें कबीर सुनो भाई साधो ‘ जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भाषा वैज्ञानिक ,लेखक ,आलोचक और बौद्ध दार्शनिक डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कबीर के जीवन के विभिन्न पक्षों पर अपनी बात रखी । बुंदेली लोक गायक रामप्रकाश कुशवाहा तूफानी ने बुंदेली लोक गायकी के विभिन्न पक्षों बात की और गीत सुनाए । भोजपुरी लोक ,साहित्य और संगीत   कार्यक्रम में  डॉ राम एकबाल  नेे भोजपुरी लोक पर बात की ।

धन्यवाद ज्ञापन में परिवर्तन साहित्यिक मंच के संस्थापक तेज प्रताप नारायण ने सामाजिक, साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन की बात कही और कहा कि दूरदराज के लेखको, साहित्यकारों, कलाकारों, संस्कृति कर्मियों और छात्रों की सहायता के लिए परिवर्तन प्रतिबध्द है और इसके लिए लगातार कार्य चलता रहेगा । कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अनुराधा ओस ,रितु रानी, अमित सिंह और मनीष सचान का विशेष योगदान रहा ।रचना चौधरी ,श्वेता सिंह ,डॉ मीनाक्षी ,विक्रम सिंह, संतोष पटेल ,रितु रानी ,रामा शंकर कुशवाहा ,अभिषेक पटेल और डॉ अनुराधा ने संचालन का कार्य बखूबी किया ।

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