प्याज को नीबू का चैलेंज

 प्याज को नीबू का चैलेंज

तेज प्रताप नारायण

बहुत दिनों बाद प्याज को चैलेंज करने वाला कोई सामने आया है ।प्याज दो और प्यार लो नहीं चलेगा ।अब नीबू का ज़माना है ।रुपया तो डॉलर के सामने हमेशा डरा सहमा सा रहता है ।पहले उसे प्याज ने चैलेंज दिया था ।अब नीबू इसकी बैंड बजा रहा है ।एक डॉलर में एक पाव नीबू । एक किलो नीबू के लिए चार डॉलर खर्च करना होगा ।इसके पीछे भी लॉजिक है । चार दिशाएं,चार धाम और लोकतंत्र के चार स्तंभ (न्याय पालिका,कार्य पालिका ,विधायिका और पत्रकारिता ) ।लोहिया का चौखंभा राज । मतलब नीबू का रेट जो सेट किया गया है ,वह आस्तु,वास्तु ,तथास्तु और ज्योतिष विद्या के अनुसार ही किया गया है । आपने देखा होगा कि कई घरों के बाहर मिर्ची के साथ नीबू को लटकने का सौभाग्य प्राप्त होता है ,नज़र से बचाने के लिए । लेकिन आजकल नज़र से बचना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है।

नज़र लागी राजा तोरे बंगले पर ।

आजकल सरकार से लेकर फेसबुक,गूगल सब नज़रें लगाकर रखते हैं ।किससे मिले, किसके पास गए,क्या बात की ,क्या खाया ,क्या पिया? सब कुछ पता है । सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो रहा है, जो इंसान की निजी बात है वह पब्लिक हो रही है जो पब्लिक है उसे प्राइवेट किया जा रहा है ।
हरि अनंत हरि कथा अनंता
समझ बूझ न पावे जनता ।

मुश्विल ही मुश्किल है जिसको नज़रें मिलानी चाहिए वो नज़रें हटा लेता है और जिन्हें नज़रे हटानी चाहिए वो नज़रें गड़ा कर बैठा है।

अब नज़रे मिलीं दिल धड़का ,मेरी धड़कन ने कहा
लव यू राजा ‘ नहीं बल्कि अंदर आजा(जेल) कहा जा रहा है ।ऐसी नज़रों की नज़र न लगे ।ऐसी नज़रों को नज़र लग जाए बस जिससे उनकी नज़रें ख़राब हो जाएं।

अब काश उनसे नज़रे मिली होतीं और उन्होंने कुछ कहा होता! अब हर काश में आस नहीं दिखती ।कुछ काश बस काश बनकर ज़िन्दगी भर तड़पाते रहते हैं ।

प्याज के बाद नीबू और क्या उसके बाद मिर्ची का नंबर आएगा और डॉलर के भाव बिकेगी ? प्याज और नीबू दोनों ठहरे मेल पहले बाज़ी मार ले गए जबकि मिर्ची के बिना प्याज बहुत कुछ नहीं कर सकता है ।दोनों हर जगह साथ साथ होते हैं सलाद में भी और सब्जी में भी ,लेकिन यहाँ प्याज के बाद नीबू बाज़ी मार ले गया ।क्या कारण हो सकता है ? ऐसा तो नहीं कि जैसा आम ज़िन्दगी में होता है वही यहाँ हुआ है।
पूछने को तो बहुत कुछ है लेकिन पूछना मना है ।अब कोई पूछे प्याज और नीबू होता है और मिर्ची होती है तो क्यों होती है ? मिर्ची भी होता क्यों नहीं है । मिर्ची कैसे स्त्रीलिंग हो गई । राम खाता है और सीता खाती है ।
तो जिससे पूछेंगे उसे मिर्ची लग जाएगी और इसकी कुछ समाज शास्त्रीय व्याख्या देकर वह महापंडित हो जाएगा। अब हिंदी माता की संतान पुरुष और स्त्री में ऐसे ही भेद विभेद और संधि विच्छेद करते हैं तो क्या करें?

नीबू का प्याज को टक्कर देने का यह भी अर्थ माना जा सकता है कि सबको मौके दिए जा रहे हैं । हर कोई विकास करेगा ।पहले प्याज ने विकास किया ,आज नीबू कर रहा है और क्या पता साल दो साल में मिर्ची जी का नंबर हो । और एक मिर्ची एक डॉलर की मिलें ।वह दिन इस देश के लिए स्वर्णिम होगा ।जिस देश के पास ज़्यादा मिर्ची वह ज़्यादा धनी ।मिर्ची को विकास का पैमाना माना जाएगा और मिर्ची का गाना गाया जाएगा ,तुम्हे मिर्ची लगी तो हम क्या करें?

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