वीरों के वीर व्हाट्सएप वीर

 वीरों के वीर व्हाट्सएप वीर

तेज प्रताप नारायण

लोग कहते हैं कि आजकल वीरों का सीज़न है ।तरह तरह के वीर सामने आ रहे हैं ।अग्नि वीर ,हड़ताल वीर ,क्रांति वीर और न जाने क्या क्या ?
दो साल पहले मैंने संजीव गंगवार जी की व्यंग्य की किताब पढ़ी थी व्हाट्सएप वीर । उस किताब से याद आया कि अपने देश में वीरों की बड़ी वैल्यू है और अपना देश वीरों से भरा हुआ है । लेकिन इक्कीसवीं शताब्दी में जिस वीरता की बड़ी चर्चा है वह है व्हाट्सएप वीर । ये वीर मोबाइल पर टैपिंग करते हुए बड़े बड़े युद्ध जीतने का माद्दा रखते हैं ।आजकल के कई सारे युद्ध व्हाट्सएप पर लड़े जा रहे हैं ।अगर व्हाट्सएप का विश्व युद्ध लड़ा जाए तो विश्व की महाशक्तियों को परास्त करने का साहस है हम लोगों में ।

व्हाट्सएप समाज सेवा भी आजकल का फैशन हो गया ।१००,२०० लोगों को व्हाट्सएप पर जोड़िए,एक ग्रुप बनाइए फिर इधर का फॉरवर्ड उधर का फॉरवर्ड इधर कर दीजिए और कर्तव्य की इतिश्री ।

अब गांधी बाबा का अहिंसात्मक आंदोलन इक्कीसवीं सदी का व्हाट्सएपातमक आंदोलन में बदल गया है जिसके द्वारा किसी भी अच्छी या बुरी चीज़ को वायरल करना चुटकियों का खेल हो गया है ।

व्हाट्सएप वीरता का यह आलम है कि काम करने से ज़्यादा व्हाट्सएप देखना ज़रूरी हो गया है ।ऑफिशियल ग्रुप,पर्सनल ग्रुप ,इंपर्सनल ग्रुप ,सोशल ग्रुप ,लिटरेरी ग्रुप और न जाने कितने परिभाषित और अपरिभाषित ग्रुप ।

जो जितने ज्यादा से ज्यादा ग्रुप का एडमिन वह उतना ही महान इंसान ।ग्रुप एडमिंस को कई बार साहेब होने का एहसास भी हो जाता है,
” साला मैं तो साहब बन गया “
व्हाट्सएप वीर ही सही मायने में आज का क्रांति वीर है ।
अच्छा तो ये बताइए आज आपने कितने मैसेज या विडियोज फॉरवर्ड किए और कितने ग्रुप में किए ?

अरे आप क्या कह रहे हैं सुबह से आप बुखार से तप रहे हैं इसलिए नहीं कर पाए ?

फिर आपका बुखार कैसे खत्म होगा ? व्हाट्सएप फॉरवर्ड पी सी एम की तरह है जब तक दो चार फॉरवर्ड नहीं होंगे तब तक कैसे मज़ा आएगा और बुखार कैसे खत्म होगा ?तो बुखार से अगर मुक्त होना है तो व्हाट्सएप पर लग जाइए ।
व्हाट्सएप लवेरिया की तरह है ,एक बार इसकी आदत लग गई तो इसके बिना दिल को चैन नहीं ।

कई बार प्रमियों को व्हाट्सएपियों से बड़ी जलन होती होगी । प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे को न निहारकर व्हाट्सएप को निहारते रहते हैं कि कोई मैसेज गिरे ।नरेश सक्सेना जी की एक कविता है
चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं
इंसानों के नहीं
वे कहीं भी
कभी भी गिर सकते हैं ।

व्हाट्सएप पर भी मैसेज गिरने के कोई नियम नहीं है । कोई कहीं भी कभी भी गिरा सकता है जब तक उकता कर कोई व्हाट्सएप सेटिंग न बदल दे ।सेटिंग बड़ी इंपोर्टेंट चीज़ होती है और सेटिंग के भी कुछ नियम होते हैं ।
सोचिएगा कितने काम आपने सेटिंग से कराए ।यह व्हाट्सएप सेटिंग नहीं है बल्कि कई अन्य तरह की सेटिंग है।चाहें तो इनको जुगाड भी कह सकते हैं लेकिन जुगाड में वह फीलिंग नहीं है जो सेटिंग में है ।मॉडर्न वर्ल्ड में इतने भदेसपने की बात कौन कहता है ?

कुछ भी हो व्हाट्सएप ने बेरोजगारों को कुछ काम तो दिया ।बेचारे सुबह से शाम तक लगे रहते हैं दीवानों की तरह ।गांव गांव में दर्जनों व्हाट्सएप ग्रुप हैं ।कुछ लैला मजनू टाइप के ग्रुप हैं तो कुछ हैप्पी न्यू इयर ग्रुप तो कुछ हैप्पी बर्थडे ग्रुप ।एक बार ग्रुप बन गया तो मान लिया वह अजर,अमर ,अविनाशी हो जाता है ,सच्चिदानंद प्रभु की तरह ।

वैसे पढ़ने की कोई तकलीफ़ नहीं करता है लेकिन अगर आपने पढ़ लिया तो शुक्रिया ।पहले जाइए कुछ फॉरवर्ड करके आइए । क्रांति होते रहने के लिए बहुत ज़रूरी है यह ।।

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