वज़ूद

 वज़ूद

इस कायनात में
अगर कुछ है
तो वो सिर्फ
“वज़ूद”
अगर वो है
तो ये सारी दुनियाँ
तुम्हारे पक्ष में है ।

इसलिए ,,,,
स्वयं को
पढ़ो,
लिखो,
सँवारो,
निखारो,
अपने लिए भी,
कुछ वक़्त निकालो !!!

ख़ुद से खुद के
दफ़्न किये गए शौकों को
पुनः जीवित करने के लिए..
गाओ,
गुनगुनाओ,
थिरको
अपनें मन की मधुर तान पर …!!!

बार-बार निहारो,
आईने में ख़ुद को,
सज-सँवर कर ,
मुग्ध हो अपने ही रूप पर,
अपनी ही देहयष्टि पर,
ये सुंदरता तुम्हारी है,
सिर्फ तुम्हारी अपनी है !!!

करो रसास्वादन
अपने गुणों का
अपनी कलाओं का
अपनी खूबियों का !!!

क्योकि….
इसी से तुम्हारा “वज़ूद” जिंदा है
तुम्हारी पहचान जिंदा है
तुम्हारा अस्तित्व जिंदा है !!!

अगर तुम्हारा वज़ूद
सबल है तो सबल भी
तुम ही बनोगी… !!!
क्या जीना,,,????
दूसरों की मुस्कुराहटों के लिए
अपने को रुला कर
अपना मन मार कर
दूसरों की ख्वाहिशें
पूरी करने के लिए !!!

वो दूसरा है
दूसरा ही रहेगा
तुम्हारा नही होगा
अगर होता वो तुम्हारा
तो तुम्हें बिखरने न देता
स्वयं की खुशियों के ख़ातिर
तुम्हें मिटने न देता
इस कदर एक दायरे में तुम्हे
सिमटने न देता !!!

तुम , तुम्हारा वज़ूद
ही तुम्हारा अपना है
और कोई दूसरा नहीं
इसलिये ,,,
सहेजो “स्व” को ….||
सीमा पटेल

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