डॉ शुभा प्रशांत लोंढे की रचनाएँ

कवियत्री, मराठी, हिंदी, उर्दू ग़ज़लकारा एलोपॅथी-आर्युर्वेद जनरल प्रक्टिशनर-२० साल से ओमनी टेक इंजिनियर-प्रोपायटर सुप्रा फार्म हाउस की ओनर साम टिव्हि,मराठी झी टिव्र्हि कविसंमेलन में सम्मिलित आकाशवाणी नागपुर,पुणे रचना प्रस्तुति दैसका,लोकमत में लेखनकार्य, सामाजिक उपक्रम सहभागिता राष्ट्रीय स्त्री गौरल पुरस्कार २०१८ऐल्गार सामाजिक साहित्य परिषद से सामाजिक साहित्य कार्य के लिए उतुंग भरारी गौरव पुरस्कार २०१९ डॉ […]Read More

आओ ट्रोल करें

डेमोक्रेसी का न्य ट्रेंड शुरू हुआ है, ट्रोल करने का। पहले ट्रोल करने के लिए शारीरिक रूप से किसी का आगा – पीछा करना पड़ता था। लेकिन अब सोशल मीडिया पर सिर्फ़ बटन दबा के काम चल जाता है और घर बैठे- बैठे ही ट्रोल किया जा सकता है ।लोग घर में नहीं ट्विटर और […]Read More

इकहरा प्रेम

मैं आज तक उसी मोड़ खड़ा हूँ जिस मोड़ पर तुम मुझे छोड़ कर गयी थी। सच में दिव्या मैं तुमको दिल से प्यार करता हूँ। तुम्हारे सिवा आज तक मैंने किसी को अपनी प्रेमिका के रूप में नही देखा। तुम्हारी अनुपस्थिति में मैं, तुम्हारे ही सपनो में खोया रहता हूँ तुम्हारी यादों में जीता […]Read More

वन्दे मातरम

वीर शहीदों की गाथा हम गाते हैं अभिमान से । करते है हम वंदन उनका शीश नवा कर मान से । वन्दे मातरम …..वन्दे मातरम….. प्राणों की आहूति देकर अमन चैन का शंख बजाया । देश प्रेम की अनुभूति से, भारत माँ का मान बढ़ाया । वन्दे मातरम…..वन्दे मातरम ….. कारगिल की घाटी में जब […]Read More

नशा

आज भी कांता का मन हर बार की तरह से डरा और सहमा हुआ था अंजाना सा भय उसके अंदर बैठ सा गया था, कि फिर कोई तूफान सा आएगा, फिर रात की नींद दिन का सुकून उड़ा कर ले जाएगा। लेकिन आज की रात उसके पति का आना मंद हवा के समान था । […]Read More

दरबारी लाल के सपने

दरबारी लाल को सपने देखने का बड़ा शौक़ था ।ड्रीम, थॉट,एक्शन, रियलिटी में उन्हें सिर्फ़ ड्रीम याद था और सब कुछ भूल गए थे ।दरबारी लाल थे तो सफ़ाई कर्मचारी लेकिन उन्होंने ड्यूटी जाना कब का छोड़ दिया था ,उन्हें ख़ुद याद नहीं था।अब बेचारे ठहरे ऐसी जाति के जिसमें सफ़ाई कर्मचारी की नौकरी को […]Read More

परिवर्तन फेस्ट का आयोजन

23 और 24 जनवरी को परिवर्तन साहित्यिक मंच द्वारा परिवर्तन फेस्ट का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न तरह के आयोजन किए गए। इसकी शुरुआत  पूर्व आई ए एस अरुण कुमार सिन्हा सीनियर पत्रकार राना सिद्दीकी ज़मान और वरिष्ठ भोजपुरी एवं हिंदी साहित्यकार डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना के उद्बोधन द्वारा हुआ ।अरुण कुमार सिन्हा ने ‘इंडिविजुअल […]Read More

कुर्सी की महिमा

तेज प्रताप नारायण कुर्सी लाल को कुर्सी की बहुत चाहत है । अब नाम ही कुर्सी लाल तो बिना कुर्सी के कैसे रहते ? ग़लती उनकी भी नहीं है, कुर्सी चुंबक की तरह आकर्षित करती है जो बैठता है वह उठना ही नहीं चाहता है। अब अपने ट्रम्प ताऊ को ही ले लीजिये बेचारे जब […]Read More

मन

मैं सीमा पटेल दिल्ली निवासी, स्वतंत्र रचनाकार हूँ लिखना पढना मेरा शौक है। कहानी, कविता, गीत, क्षणिका, हायकू मेरी प्रमुख विधाएं है , अभी लिखना जारी है….. “सांस चलती रहे, कलम चलती रहे जिंदगी की डगर यूँ ही कटती रहे ।।” || कविता || मन में जब प्रश्न से उठते है तब मन अधीर हो […]Read More

गोमा

विमलेश गंगवार लेखिका ,संस्कृत की भूतपूर्व प्रवक्ता हैं । इनके तीन उपन्यास और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ।विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी कहानियाँ ,कविताएँ और लेख प्रकाशित होते रहते हैं दिरनियां नदी अपने पूरे वेग से किलोलें भरती हुई प्रवाहित हो रही थी। दिरनियां के किनारे पांच पुरातन वृक्षों का झुरमुट खड़ा […]Read More