गाँधी ढोंगी नहीं हैं

 गाँधी ढोंगी नहीं हैं

.रजनीश संतोष

मेरी जानकारी में गांधी इकलौती शख़्सियत हैं जिन्होंने अपनी स्थापित हो रही महानता को अपने जीते जी खुद मटियामेट करने में कोई संकोच नहीं दिखाया और अपनी सारी कमज़ोरियों, ग़लतियों और नाकामियों को ईमानदारी से स्वीकार किया ..

अधिकतर महान लोगों के जीवन के कमज़ोर प्रसंग और ग़लत निर्णय आदि उनकी मृत्यु के बाद के सालों में सामने आते हैं, जब वो महान घोषित हो चुके होते हैं। अगर किसी के ज़िंदा रहते ऐसा होता है तो समाज उसे महान मानने से इनकार कर देता है लेकिन गांधी अपवाद हैं।

गांधी महान इस लिए भी हैं क्योंकि वे एक आम इंसान की तरह अच्छे-बुरे दोनो हैं। सही-ग़लत निर्णय लेते हैं, ग़लतियाँ करते हैं फिर पश्चाताप करते हैं, और लगातार सीखते हैं.. उनकी महानता न तो पैदाइशी है और न ही एकाएक आसमान से अवतरित होती है। उनकी महानता की एक-एक ईंट को रखे जाते हुए आप देख सकते हैं। उनके चलने लड़खड़ाने गिरने और फिर खड़े होने की हर प्रक्रिया शीशे की तरह हमेशा सबके सामने रही है। यह अन्य किसी महान शख़्सियत की ज़िंदगी के बारे में आपको नहीं मिलेगा।

जो अन्य लोग महान हैं वे निर्विवाद रूप से महान हैं। उनमें कोई कमज़ोरी, कोई कमी, कोई ग़लती हमें नहीं दिखाई पड़ती। यानी दो ही बातें हो सकती हैं .. या तो वे दैवीय गुणों से सम्पन्न हैं या उन्होंने अपनी सहज मानवीय कमज़ोरियों को छिपाने के उपक्रम किए हैं। यह भी एक तरह का ढोंग ही है.

गाँधी एक आम इंसान हैं, आप उन्हें भला बुरा कह सकते हैं, गरिया सकते हैं और शायद ही कोई गांधीवादी आप पर आक्रामक हमला करेगा। यह गाँधी की बड़ी सफलता है। गाँधी हवाई दर्शन नहीं झाड़ते, वे उतना ही कहते हैं जितना खुद व्यवहार में उतार सकते हैं, और जिस विचार को दिल से मानते हैं उसे पहले अपने जीवन में उतारते हैं फिर दूसरों से अपेक्षा करते हैं, ऐसी नैतिक ईमानदारी बहुत विरली है।

गांधी ढोंगी नहीं हैं …

रजनीश

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