कवि वासुकि प्रसाद “उन्मत ” की कविताएँ जन पक्षधरता की कविताएँ हैं जिनमे गहरे प्रतिरोध के स्वर दिखते हैं । आप भी पढ़िए । जनता की जनवादी आवाज़ कोरिहा करोरिहा करो जनता की कविता कोजनता के कवि को रिहा करो जनता के साहसी प्रतिपक्ष को षडयंत्र के तहत जनता की अभिव्यक्ति कोसीखचों में जकड़ करख़ुद […]Read More
युवा कवि और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्नातक ,टाटा पावर में कार्यरत पंकज पटेल ‘प्रयाग ‘ की कविताएँ आधुनिकताबोध की समसामयिकता वाली कविताएँ हैं जिसमें तत्कालीन समाज का दर्द दिखाई पड़ता है ।। कर्मचारी हूँ रोज नौकरी करने जाता हूँ | सुबह आशाओं की पुड़िया जेब में डाल, किसी की पढ़ाई बीमारी शादी कर्ज […]Read More
【मरम्मत】 फिलहाल, मेरा जूता टूट गया हैइसे ठीक कराना हैबाहर भारी बारिश है पानी बरस रहा हैनदी ने जूता नहीं पहना हैजबकि उसको भी दूर जाना है फिलहाल, उधेड़बुन में हूँआखिर जूताबार बार क्यों टूट जाता है मेरानदी का नहीं टूटता बादल का जूता उससे भी पुराना हैऔर उस मोची का जूताजो कल्पना में बहुत […]Read More
कानपुर के युवा कवि और कथाकार अभिषेक पटेल ‘अभी ‘ सम्प्रति इलाहाबाद बैंक में कार्यरत हैं ।’ एकलव्य ‘सामाजिक यथार्थ की एक समसामयिक कविता है । तुम बने रहो एकलव्य ! पूजते रहो द्रोणाचार्य ! बलि देते रहो अपने अंगूठे की ! तुम क्यूँ नही समझते , कि तुम्हारी योग्यता , तुम्हारी कला प्रवीणता , […]Read More
【सुनो मित्र】 ताश का महल मत होनाकि कुछ दिलजलो की अंगुलियाँआतुर रहती हैं चुटकी बजाने को खोल को तोड़हो जाना बेहतर चारपायाकुछ नामुरादों की अंगुलियाँआतुर रहती हैंअंडो की जर्दी चुराने को थप्पड़ को दिल से लगाओगेतो उठ न फिर पाओगेकुछ नमूनों की अंगुलियाँआतुर रहती हैंयहाँ मुक्का हो जाने को , दर्द हो कराहना मतमुस्कुरा देनाये […]Read More
काव्य कृति- अपने-अपने एवरेस्टरचयिता- तेज प्रताप नारायणप्रकाशन- साहित्य संचय प्रकाशनमूल्य- ₹300 कवि तेज प्रताप ने समाज मे फैली छुआ-छूत की परम्परा से गहरे से आहत हैं. समाज का उच्च वर्ग निर्बलों को दबाने का प्रयत्न हमेशा से करता रहता है.‘वह उसकी औरतों से प्यार कर सकता है,स्पर्श, चुम्बन,सम्बन्ध बना सकता है,पर उसका छुआ नही खा […]Read More
त्वरित विमर्श मछली जल में रहती हैवह हम सब से कहती हैकर लो पानी की रखवालीतभी मनेगी होली दिवालीपहले आया हीलियम और हाइड्रोजनफिर आया ऑक्सीजनदो हाइड्रोजन ने एक ऑक्सीजन को दोस्त बनायाउनकी दोस्ती ने रंग दिखायाफिर धरती पर पानी आया ।Read More
यू पी के पूर्व मिनिस्टर स्मृतिशेष श्री चेतराम गंगवार जी पर संस्मरण की यह आख़िरी किश्त है । उनकी बेटी सुप्रसिद्ध उपन्यासकार /कथाकार श्रीमती विमलेश गंगवार ‘दिपि’ द्वारा लिखे गए सुंदर संस्मरण यशकायी श्री गंगवार के प्रति सच्चे श्रद्धा सुमन हैं । परिवर्तन भी ऐसे ज़मीन से जुड़े महान नेता को सादर नमन करता है […]Read More