यू पी के पूर्व मंत्री ,स्मृतिशेष चेत राम गंगवार जी पर उनकी सुपुत्री सुप्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार विमलेश गंगवार’दिपि’ का संस्मरण । शायद 1975 76 में देश में एक ऑधी चली थी परिवार नियोजन की । और फिर भयंकर तूफान शुरू हुआ नसबन्दी आप्रेशनों का ।इतनी सख़्ती बरती गई कि इतने केस लाओ तो तनख़्वाह […]Read More
डॉ राकेश कुमार सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ ऊंचे–ऊंचे साल के दरख्तों से होकर मन–मस्तिष्क को उद्वेलित करती हवा, जंगल की पगडंडियों पर धीमे से उड़ते पेड़ों के सूखे पत्ते, पंख फड़फड़ाते परिंदों का कलरव, चूका बीच पर विशाल शारदा जलाशय की नीली लहरों के साथ दूर तक दृष्टिगोचर होते नेपाल राष्ट्र के हिमालय और इन सबके […]Read More
यू पी के पूर्व मंत्री स्मृतिशेष चेत राम गंगवार जी पर उनकी बेटी विमलेश गंगवार ‘दिपि‘ द्वारा लिखा संस्मरण जो कथाकार और उपन्यासकार हैं । सी .5 दारूलशफा लखनऊ । पिता श्री का लम्बी समयावधि तक आवास रहा । सी .6 में आमों के गुच्छों से लदा वृक्ष जो दूसरे माननीय विधायक जी के ऑगन […]Read More
यह संस्मरण उनकी पुत्री विमलेश गंगवार ‘ दिपि ‘ द्वारा लिखे गए हैं जो प्रसिद्ध उपन्यासकार एवं कथाकार हैं । बरेली से नैनीताल जायेंगे तो आटामांडा रेलवे स्टेशन से थोड़ा आगे बहुत चहल पहल वाला गाँव है या यों कहें कि बहुत उपयोगी बाजार है, नाम है जादोंपुर ।आम जनता के शादी व्याह से लेकर […]Read More
रजनीश संतोष .यह सोचना बेकार है कि युद्ध में लाखों लोग मरेंगे पहले भी युद्ध हुए हैंउनके आँकड़े बड़े सलीक़े से सहेजे गए हैं. शहादत के लिफ़ाफ़े में भरी जाती हैं हत्याओं की चिट्ठियाँ मौत से कहीं महत्वपूर्ण है ज़िंदगीइसलिए यह सोचिए कि युद्ध के बाद जीवित कौन लोग बचते हैं यह जानना फ़िज़ूल है […]Read More
स्तम्भकार:दिनेश कुमार सिंह यह लेखक के अपने विचार हैं। करोना एक दैवीय आपदा है इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता!मगर सरकार की अदूरदर्शिता इस आपदा से उत्पन्न आर्थिक अब्यवस्था के लिए जरूर जिम्मेदार है!देश बहुत ही कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है ऊपर से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तनाव , चीन की […]Read More
सिद्धार्थ सिंह ‘ लंदन वाले ‘ भाई ये तो ग़ज़ब हो गया, रंगो का भी मज़हब हो गया। कोविड़-19 में शहर बँटे रेड, ऑरेंज और ग्रीन, उसमें भी राजनीति ढूँढ रहे कुछ तमाशबीन। दो पड़ोसी दोस्त फ़ेसबुक में भिड़ गए, एक खुश था कि ज़ीरो केसेज़ वाले क्षेत्र को ग्रीन बोल रहे हैं और दूसरा […]Read More
यह संस्मरण उनकी बेटी विमलेश गंगवार ‘दिपि‘ द्वारा लिखा गया है ,जो वरिष्ठ कथाकार एवं उपन्यासकार हैं । वह अपने पर ही कुठाराघात करते थेहमलोग एक सप्ताह हरिद्वार रह कर लखनऊ लौटे तो पिता श्री बोलेकैसा रहा हरिद्वार भ्रमण ?हमने कहा बहुत सुन्दर रहा परगंगा घाट के इर्द गिर्द बैठे भिखारियों को देखकर बहुत दुख […]Read More
महेश वर्मा खूननहीं बाँटता हैहमें खून।बल्कि बांटताऔर काटता है ,ये धर्म-मजहब, लिंगजाति और नस्लवाद काक्रूर व अमानवीयभेद-भाव युक्त जुनून।ऊपर से हाँकते हैअपने-अपने बड़प्पन कीबढ़-चढ़कर के डींग।जान को जबआये संकट।और खून की जबपड़े जरूरत ।तब सब खूनलगे इक रंग।न कोई न हिन्दू,न कोई मुस्लिम ।न इसाई और यहूदी।न कोई कालान कोई गोरा।नर हो या नारीसब का […]Read More
【 पुष्प 】 पुष्प एक पड़ा राहों परमन में था यह सोच रहाक्यों अलग हुआ अपनों सेक्या है इसकी असली वजह।सुंदरता मेरी बनी है घातकया सहृदयता का शिकार हुआखड़े शूल थे पास मेरेउन पर न प्रतिघात हुआ।प्रसन्न हुआ था एक दिन मैंमानव के गले का हार बनापता नही था उसके अन्दरमानव है या शैतान छिपा।मन्दिर […]Read More