दिनेश कुमार सिंह जब दुनियाँ 7जी से 10जी की गति से चल रही और हम 3जी से 4 जी पहुँचने के लिए भी दूसरे देशों की मदद ले रहे है।हमारे देश के पास न तो विश्वस्तरीय टेक्नोलॉजी है ओर न ही विश्व स्तरीय रिसर्च सेंटर!बेरोज़गारी, भुखमरी,दवाई अस्पताल,किसानों की दुर्दशा आज़ादी के इतने सालों बाद भी […]Read More
दिनेश कुमार सिंह हर व्यक्ति के जीवन में उतार चढ़ाव आता है कभी जीत मिलती है कभी हार। सफलता और असफलता के बीच का जो डर है वही आदमी को परेशान करता है।क्योंकि आज के आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम सबने आवश्यकता से अधिक बडी जिम्मेदारियों को ओढ़ लिया है,कहीं घर की तो कहीं […]Read More
सीमा पटेल हाँ मुझे पसंद है ,,तुम्हारा मधुर स्पर्शक्योंकि ….लिए थे मैंने तुम्हारे संगअग्नि के सात फेरेखाई थी कस्में,कुछ तुमने और कुछ मैनेभरी थी माँग तुमनेप्रेम के सिंदूरी रंग सेहाथ पर हाथ रखकरहुआ था अपना,“पाणिग्रहण संस्कार”लेकर आये थे दुल्हन के रूप मेंमुझे , तुम अपने घर मेंतब बजी थी ढोलकी,स्वागत में मेरेगाये थे मंगल गीत […]Read More
तेज प्रताप नारायण रीता को दरोगा पकड़ कर थाने ले गया ।सुबह से शाम तक बिठाए रखा ।रीता हाथ जोड़े गिड़गिड़ाती रही ,”साहब हमरी और हमरे मनई कौनो ग़लती नही है ।हमरे मरद तो सिर्फ •••”वाक्य पूरा भी न हो पाया था कि हव लदार का डंडा फिर से चल गया ।रीता चीख़ पड़ी ।पूरा […]Read More
डॉ. देवेंद्र सिंह माटी फाउंडेशन, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश कृषि भारत में आजीविका का साधन होने के साथ-साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक उत्सवों एवं पर्वों की प्रतीक है। ग्रामीण जनसंख्या के 75 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती आधारित जीविका पर निर्भर हैं। कृषि का राष्ट्रीय आय में लगभग 27.4 प्रतिशत का योगदान है। […]Read More
आदमी के क्रांतिकारी विचारों का होना उसकी सोच नहीं है । बल्कि उन ढेर सारी वफादारियों का पुलिंदा है, जो उसके कर्तव्यों में शामिल था। ज़िंदगी की विवशता थी , और उसके जीने का तरीका। हम अक्सर सोचते हैं; लाल रंग, लाल ही होगा। व्यक्ति की सोच है। समाज में, हर आदमी की अलग सोच […]Read More
सिद्धार्थ सिंह लंदन वाले एक हाथ में लकड़ी की हथौड़ी और दूसरे में ठप्पाइन्होंने जज किया हुआ है चप्पा चप्पा जजमेंट देखिए –तुम अमीर तुम गरीबतुम अछूत ना आना क़रीब तुम हिंदू तुम मुसलमानक्या करोगे बन के इंसान तुम लेफ़्ट तुम राइटकरते रहो आपस में फ़ाइट तुम शाकाहारी तुम मांसाहारीक्यूँ खाते घास फूस या निहारी […]Read More
सामाजिक यायावर आस्ट्रेलिया से जिन देशों ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वीकार कर रखी है, वे देश अपने आप अपने नागरिकों को बहुत बेहतर जीवन शैली उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व निर्वाह करते ही हैं। उदाहरण के लिए ऑस्ट्रेलिया को लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है। स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार […]Read More