सुभाष चन्द्र गुप्ता उर्फ़ मुद्रा राक्षस

पुण्य तिथि विशेष –2 ,by Dr Rajendra Prasad Singh शूद्रों के चित्रकार थे मुद्राराक्षस! एक चित्रकार था – बादलों का चित्रकार ! वह ताजिंदगी बादलों का चित्र बनाता रहा – काले, भूरे, मटमैले बादलों का। बादलों के चित्र कभी पूरे नहीं हुए। जिंदगी पूरी हो गई। मुद्राराक्षस शूद्रों के चित्रकार थे। वे ताजिंदगी शूद्रों के […]Read More

सामाजिक सरोकार के लेखक मुद्रा राक्षस

पुण्य तिथि विशेष मुद्राराक्षस के नाम से विख्यात सामाजिक चिंतक ,उपन्यासकार ,व्यंग्यकार ,आलोचक एवं नाटककार सुभाष चन्द्र गुप्ता का जन्म 21 जून 1933 को लखनऊ के पास बेहटा नामक गाँव में हुआ था ।मुद्रा राक्षस ने 12 उपन्यास, 3 व्यंग्य संग्रह,पाँच कहानी संग्रह,पाँच आलोचना संबंधी पुस्तकें, तीन इतिहास संबंधी पुस्तकें एवं 10 से ज्यादा नाटकों […]Read More

ख़तन मतन दुई कौड़ी पावा

अवध की संस्कृति ख़तन मतन दुई कौड़ी पावा कौड़ी लेकर गंग(गंगा) बहावा गंगा माता बालू दिहिन बालू लेकर भूजा दिया भूजा हमको लैया दिया लैया ले घसिहरवा को दिया धसियरवा हमको घास दिहिस घास लेकर गैय्या को खिलाया गैय्या हमको दुधू दिहिस दुधू लेकर खीर पकावा खीर लेकर सबको खिलावाRead More

नदी

तेज प्रताप नारायण पिछली बार गाँव जाने के बाद मोहन की बड़ी इच्छा हुई थी कि गाँव से कुछ कोस दूर उन जंगलों को भी देखा जाए जिनके बीच काफ़ी वक़्त उसने बिताया था।किसी न किसी बहाने जंगल से उसका वास्ता पड़ा ही करता था ,कभी घर में कुछ खान पान की व्यवस्था होती तो […]Read More

कान की व्यथा

दिनेश कुमार सिंह भईया !!!,मैं हूँ कान। हम दो हैं। जुड़वां भाई हैं, लेकिन हमारी किस्मत ही ऐसी है कि आज तक हमने अपने दूसरे भाई को देखा तक नहीं। पता नहीं कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है। दुख सिर्फ इतना ही नहीं है। हमें जिम्मेदारी सिर्फ […]Read More

‘ टेक्निकल लव ‘ पर एक पाठक की सामान्य राय

उपन्यासकार:तेज प्रताप नारायण प्रकाशक:साहित्य संचय ,समीक्षक :,रजनीश संतोष रजनीश संतोष प्रसिध्द ग़ज़लगो,कवि और लेखक हैं । Tej Pratap जी के पहले उपन्यास ‘टेक्निकल लव’ (साहित्य संचय से प्रकाशित) के बारे में एक सामान्य पाठक की अपनी राय। “.काफ़ी अरसा हो गया जब उपन्यास ख़ासकर भारतीय लेखकों को पढ़ना छोड़ दिया था। वक़्त भी नहीं था […]Read More

बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर

बहुत कुछ नहीं बदला हैआज भी जंगल उजाड़े जा रहे हैंआदिवासी मारे जा रहे हैंलोगों के घर तोड़े जा रहे हैं ,बिरसा तुम्हें आना होगा फिर एक बारक्रांति का बिगुल बजाना होगा फिर एक बाार उलगुलान करना होगा फिर एक बारउलगुलान!!! उलगुलान!!! (असीम कोलाहल )तभी निकलेगाजनता की समस्याओं का हल । 1875 में रांची के […]Read More

कोरोना से प्रभावित मासूम बचपन – कैसे जीतें लड़ाई।

आकांक्षा दता कोरोना, कोविद१९ , लाकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग, वो नए शब्द हैं जो २०२० में बच्चों की शब्दावली में जुड़ गए हैं। यह साल बच्चों के लिए एक अनूठा, अजीबोग़रीब व विस्मरणिय वर्ष बन के आया है। छोटे या बड़े सभी बच्चे हैरान हैं कि वे घर में बंद क्यों हैं? सब कुछ बंद क्यों […]Read More

लोक और आधुनिकता के समन्यवक हबीब तन्वीर

लेखिका ,ऋतु रानी , केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ ,हरियाणा में शोधार्थी हैं ।भारतीय रंगमंच कहते ही हमारे जहन में शास्त्रीय रंगमंच की एक छवि उभरकर आती है। लेकिन ‘लोक’ को भारतीय रंगमंच का पर्याय बनाने में हबीब तनवीर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। देखा जाए तो हबीब तनवीर ने शास्त्रीय रंगमंच की तकनीक […]Read More

डॉ.हरेराम सिंह की कविताएँ

रोहतास ,बिहार के डॉ हरेराम सिंह भोजपुरी और हिंदी के कवि हैं ।इनकी अब तक बीस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैैं ।। 【 जादू 】 दुनिया कितनी जल्दी बदल जाती है, प्रेमिका के अधर कितना जल्द बता देते हैं। जब कोई दोस्त दगा करता है,तो भी पता चलता है, जब अनजाना व्यक्ति हाथ बढाता है,तब […]Read More