रचना चौधरी का लेख: कोरोना काल और अवसाद

रचना चौधरी कवयित्री और कहानीकार हैं । कोरोना से बचना एक हद तक संभव है शायद। किंतु इस कोरोना काल में अप्रत्यक्ष रूप से एक दूसरी बीमारी दबे पाँव पसर रही है , जिसका नाम है अवसाद! जिसके परिणामस्वरूपआत्महत्या या सामूहिक आत्मदाह जैसी घटनाएं घटित हो रही हैं। और परिस्थितियों को देखते हुए ये कहना […]Read More

कबीर जयंती पर

डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक ,आलोचक,लेेेखक और बौद्ध दार्शनिक हैं । दर्शन के क्षेत्र में जो स्थान बुद्ध का है… राजनीति के क्षेत्र में जो स्थान सम्राट अशोक का है…साहित्य के क्षेत्र में वहीं स्थान कबीर का है। हिंदी साहित्य के पहले इतिहासकार गार्सां द तासी ने 19 वीं सदी में कबीर के […]Read More

भारती प्रवीण की कविताएँ

भारती प्रवीण नवोदित कवयित्री और होममेकर हैं । 【अधूरा मिलन 】 तेरा साथ रहा वो साथ , साथ नही था.. तू संग तो था पर आस पास नहीं था.. मिलते रहे हम यूं तो पल पल मिलने को, पर संग होगा नही हमेशा ये आभास वहीं था… तेरी परछाई चला करती रही हर दिन यूं […]Read More

प्रख्यात लेखक और विचारक रमेश चंद्र के ”कीबोर्ड”से :

बुद्धिजीवी तथा प्रबुद्ध वर्ग– ‘बुद्धिजीवी’ तथा ‘प्रबुद्ध'(प्रज्ञावान या विवेकशील या Intellectual)इन शब्दों का प्रयोग करते समय हम सामान्यतः इनके वास्तविक अर्थ पर ध्यान नहीं देते और फिर हम जो कहना चाहते हैं,उसका पूरा का पूरा मतलब ही बदल जाता है।वस्तुत: ‘बुद्धिजीवी’ का मतलब है वह व्यक्ति जो अपनी आजीविका बौद्धिक कार्य करके अर्जित करता है, […]Read More

वरिष्ठ लेखिका नीलम सक्सेना से बात चीत

परिवर्तन :कुछ अपने बारे में बताइए ? नीलम सक्सेना : मैं एक इंजीनियर हैं व पुणे में अपर मंडल रेल प्रबंधक के पद पर कार्यरत हूँ| कवितायेँ एवं कहानियां लिखना मेरा शौक है| मेरी १५०० से अधिक रचनाएं विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं| मेरे चार उपन्यास, एक उपन्यासिका, छह कहानी […]Read More

वरिष्ठ कवि,लेखक, समीक्षक और पत्रकार कौशल किशोर से बातचीत

साहित्य में जीवन की आलोचना ही नहींपरिवर्तन की गूंजें व आहट भी – कौशल किशोर परिवर्तन : कुछ अपने बारे में बताइए ?कौशल किशोर: अपने बारे में क्या बताऊं। मैं कौशल किशोर कवि, लेखक, समीक्षक और पत्रकार। साहित्य और समाज की दुनिया में पांच दशक से अधिक का समय बीत गया। अब तो स्मृतियों पर […]Read More

मज़दूर

Mukesh Kumar is an IRS officer. 1] गंगा प्रसाद खेत पर काम करते-करते थक कर बैठा था. देखा,सामने उसकी पत्नी राम पियारी खाने को लिए आ रही थी. मन ख़ुश हो गया. “बेटा जाग्रत और बेटी चेतना नहीं आए ?” खाना खाते हुए गंगा प्रसाद ने पूछा. “दोनों भाई- बहन कुछ पढ़ रहे थे, सो […]Read More

मृत्यु लोक

अवधेश यादव ,महराजगंज,उत्तर प्रदेश . मृत्यु लोक (कहानी) जुलाई के महीने में आसमान को बादलों ने चारो तरफ से घेरे हुए थे।बाहर सड़क पर एक दम गुप् अंधेरा छाया हुआ था।रह-रह के बारिश की बूंदे हल्की-हल्की फुहारों के साथ धरती को गीला किये जा रही थी। सड़क के उस पार बने दो मंजिले मकान से […]Read More

संजीव ‘शाक़िर ‘ की कविताएँ

संजीव वर्मा “शाकिर” केनरा बैंक,छपरा में कार्यरत हैं । 【 दास्तान-ए-दिल 】 खो गए क्या?जैसे बारिश की बूंद समंदर में खोती है।या फिर सो गए क्या?जैसे नन्ही बच्ची मां की गोदी में सोती है।। खैर छोड़ो,अब इतनी भी फिक्र, क्या करना।जो लौटे ही ना,उसका ज्यादा जिक्र, क्या करना।। तेरी बहकी-बहकी बातेंअब भी याद आती हैं।वो […]Read More

कहानी नन्हे शेरू की- एक अंधा तेंदुआ शावक

। डॉ राकेश कुमार सिंह,वन्यजीव विशेषज्ञ हैं ।साहित्य में गहरी अभिरुचि रखते हैं । माँ मुझे बचा लो, मां तुम कुछ बोलती क्यों नहीं, तुम कहाँ हो मां, मुझे कुछ भी दिखाई क्यों नहीं पड़ रहा, मेरे छोटे भाई बहन की आवाज़ क्यों नहीं आ रही, मुझे ये लोग मार डालेंगे मां।“ शायद यही शब्द […]Read More