समकालीन युवा कवि डॉ शिव कुशवाहा सामाजिक सरोकार के कवि हैं । {चिड़ियां डर रही हैं } उन्मुक्त आकाश मेंउड़ान भरने वाली चिड़ियां डरी हुई हैंअपने स्याह होते परिवेश से दिशाओं में विचरने के लिएनहीं है उनके पास खुला स्पेसवे नहीं कर पा रही हैं वह सबकुछजो चिड़िया होने के लिए होता है जरूरी उनके […]Read More
{राजेश पटेल } मिर्ज़ापुर के पूर्व विधायक श्री यदुनाथ सिंह की कहानी ।परिवर्तन इस लेख में पूर्व विधायक द्वारा एस डी एम और दरोग़ा के साथ वार्तालाप के कुछ अंशों से असहमति प्रकट करता है । नाम यदुनाथ सिंह, काम-राजनीति, 56 बार जेल यात्रा, कट्टा भी चलाना नहीं आता लेकिन डरते थे बड़े-बडे माफिया। मिर्जापुर […]Read More
तेज प्रताप नारायण { मराठा शासक छत्रपति संभा जी के जन्म दिवस पर उनके जीवन पर आधारित एक लेख }छत्रपति संभा जी छत्र पति शिवा जी की पत्नी सई बाई के पुत्र थे ।इनकी माता सई बाई का इनके जन्म के दो वर्ष के बाद निधन हो गया और इनकी दादी जीजाबाई ने इनका पालन […]Read More
त्वरित विमर्श आँखों से देखूँ एवेंज़र्स की दुनिया नाक से लूँ पिज़्ज़ा,बर्गर और पास्ता की सुगंध कानों से सुनूँ डायनासोर की आवाज़ें मुँह से दूँ पिज़्ज़ा ,बर्गर और पास्ता का ऑर्डर हाथों से बनाऊँ फ़ाइटर प्लेन पैरों से मारूँ फ़ुट्बॉल को किक ।Read More
{लेखक : आशीष kr उमराव “पटेल”, कैरियर & एकेडेमिक मेंटोर, स्पीकर, मोटीवेटर, निदेशक- गुरु द्रोणाचार्य (IIT-JEE, NEET & NDA इंस्टिट्यूट), फ़ोन & व्हाट्सप्प-8650030001} देश ने लॉकडाउन का करीब डेढ़ महीना पूरा कर लिया है। केंद्र और राज्य सरकारें लॉकडाउन से बाहर निकलने के लिए सही रणनीति को लेकर चर्चा कर रही हैं। हालांकि कई तरह […]Read More
सन्तोष पटेल महादेवी छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं- कल्पना की अतिशयत, बौद्धिकता, रहस्यवादिता, वेदना इनकी कविता की विशेषताएं हैं। कुछ आलोचक महादेवी को छायावादी कवयित्री न मानकर रहस्यवादी मानते हैं किंतु रहस्यवाद की प्रधानता होते हुए भी महादेवी वर्मा छायावाद के आधार स्तंभों में से एक हैं। वास्तव में रहस्यवाद छायावाद की […]Read More
{वायरस } निश्चित रूप से कुछ मौतें वायरस से होंगी. और कुछ मौतें होंगी इस कारण से कि समय पर सही निर्णय नहीं लिए गए. कुछ मौतें इस कारण से भी होगी कि धन्ना सेठों के बैंक बैलेंस बने रहें. तमाम मौतें उनके नाम रहेंगी जिनके लिए ‘राजनीति’ प्रधान और ‘लोक कल्याणकारी राज्य’ गौण हो […]Read More
संजय श्रमण चार अरिय सत्य उन चार तीलियों की तरह हैं जो धम्मचक्र को उसकी धुरी से जोड़कर गतिमान रखती हैं। धम्मचक्र की धुरी ‘अनित्यता’ के दर्शन मे है, यही अनित्यता की दृष्टि जब भौतिक जगत से मनोजगत में प्रवेश कर जाती है तब ‘अनत्ता’ का दर्शन बन जाती है। मनोजगत में जो अनत्ता है […]Read More
आकांक्षा दत्ता कहानी कैसे पढ़ी जाए?कहानी सुनाने का सही समय व सही तकनीक क्या हो सकती है जिस से बच्चा किताबों से जुड़ा रहे। जब आप अपने बच्चे में कहानी पढ़ने और सुनने की रूचि उत्पन्न करना चाहते हैं ।तभी ऐसे कई सवाल मन में आते होंगे। यकिन मानिए यह कोई कठिन राकेट विज्ञान नहीं […]Read More