मेरे शिक्षक

तेज प्रताप नारायण ,समकालीन कविता में हस्तक्षेप रखने वाले रचनाकार हैं जिनकी रचनाओं में इंसान और इंसानियत के साथ समूची प्रकृति को बचाने की जद्दोजहद दिखाई पड़ती हैं ।उनकी चिंता हाशिए के लोग हैं । वे समाज मे उनका खोया हुआ स्थान दिलाना चाहते हैं। उनकी कविता संघर्ष की कविता है,प्रकृति की कविता है । […]Read More

CORONA @ 2020

कथाकार कल्याण सिंह, आंध्रप्रदेश में रहते हैं ।इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी टेक ,लेखक कहानियों की इंजीनियरिंग भी कर लेते हैं और संवेदना का करंट बहने लगता है  ।लेखक की यह कहानी कोरोना काल का जीवंत दस्तावेज है । हेलो मम्मी ! – हां बेटा। ” अभी देश में संपूर्ण लॉक डाउन लग रहा है मुझे […]Read More

गाँव के गबरू जवान…?

देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज आई ई टी लखनऊ से बी टेक् और फिर उत्तर प्रदेश शासन से रिटायर्ड (वीआर एस) दिनेश कुमार सिंह ,लखनऊ से प्रकाशित ‘डे टू डे दैनिक’ के उपसंपादक हैं ।समाज के उपेक्षित वर्गों को यथा सम्भव सहायता भी देते हैं । गाँवके गबरू जवान अब गोबरैले कीड़े होते जा रहे […]Read More

दुष्यंत कुमार (01-09-1933 — 30-12-1975 ) की गज़लें

               दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितम्बर, 1933 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के गांव राजपुर नवादा में हुआ था। उनका पूरा नाम दुष्यंत कुमार त्यागी था। उन्होंने इलाहबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी। शुरुआत में वे परदेशी के नाम से लिखा करते थे, किन्तु बाद में वे अपने ही नाम से लिखने […]Read More

‘परिवर्तन’ अनुराधा की कविताओं से

गोंडा ,उत्तरप्रदेश की युवा कवयित्री अनुराधा मौर्या की कविताएं आधी आबादी की गूँजती आवाज़ हैं जो मानो समाज को,परिवार को झकझोर देना चाहती हों ।Email-anupearl2018@gmail.com [ समाज के अजीब समीकरण] मैं उलझ पड़ती हूँ ! समाज के उन अजीब समीकरणों में जिनमे लड़को के लिए दो और दो चार पर मेरे लिए सिर्फ तीन ही […]Read More

लाल वाली गुड़िया

कल्याण सिंह, आंध्रप्रदेश  इंसानियत भी उस दिन जाग उठती है। जिस दिन उसे अपने कर्मों का ज्ञान हो जाता है। बस कोई सच्चा गुरु होना चाहिए सही पथ दिखाने वाला या कोई ऐसी घटना घटित हो जो उसकी इंसानियत पर सवाल खड़े कर दे। अरे पवन ! कब चलोगे दशहरे का मेला देखने ? – […]Read More

गुड बॉयज़

कोलकता की रचना चौधरी उभरती हुई रचनाकार हैं ।इनकी रचनाएँ कई कविता संग्रहों में प्रकाशित हो चुकी हैं । साझा उपन्यास, ज़िन्दगी हैंडल हो जाएगी , का सहसंपादन भी कर चुकी हैं । उछलता, कूदता और थोड़ा बेपरवाही से भरा छः साल का “प्रथम” यानी “पृथू” अपने मम्मी पापा (नलिनी-जतिन) के साथ काउंसलर के कमरे […]Read More

ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए ??

व्यंग्यकार रवींद्र कुमार जाने माने कवि और लेखक हैं ।भारतीय रेल कार्मिक सेवा के पूर्वअधिकारी रवींद्र कुमार भारत सरकार विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं और संयुक्त सचिव के पद से कार्यमुक्त हुए हैं ।अंग्रेजी और हिंदी में समान भाव से लिखने वाले लेखक की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । ध्यान चंद […]Read More

हक़ चार आने का

Kalyan singh ,Secunderabad आज बहुत दिनों बाद अपने परममित्र से मिलने जाने का उत्साह मुझे मन ही मन बहुत व्याकुल किये जा रहा था। कब जल्दी पहुँचू … कब उससे गले मिलू और अपने दिल की किताब उसके सामने खोलूँ। बंशी काका के खेत से ऊख चुराना ; गुल्ली – डण्डा खेलते हुए हमेशा निशाना […]Read More

ज़िन्दगी है हैंडल हो जाएगी पर एक लेखिका की राय

बिहार की उषा लाल सिंह वैसे तो पेशे से टीचर हैं लेकिन लेखन  भी बहुत बढ़िया करती हैं जो बड़ा नेचुरल और फ्लो में होता है । “जिंदगी है… हैंडल हो जाएगी” नाम में तो कोई खास आकर्षण नहीं पर इतना तो शीर्षक से ही तय था कि इसका विषय वस्तु किसी और लोक की […]Read More