रोहित प्रसाद पथिक की कविताएँ

[तुम मर तो नहीं सकते हो ] जहां से क्लियर होता है ब्रह्मांड जहां सिर्फ मौत के पौधे उगते हैं आहिस्ता-आहिस्ता वचन को पढ़कर तुम एक देश नहीं बदल सकते मैं जानता हूं काले विचारों से होकर युद्ध करना होगा तुम्हें क्योंकि विचार फक्कड़ है फिर तुम्हें एक विशालकाय बीज से भी मौत के स्वर […]Read More

Parivartan Poet of the week

पिछले हफ़्ते सीमा अहिरवार’ज्योति ‘ और विजय गौतम ‘मूकनायक’ की कविताओं को पढ़ने वालों ने बहुत पसंद किया । आप भी इनकी कविताओं को theparivartan.co.in पर पढ़ सकते हैं । यह परिणाम कविताओं पर कमेंट और पढ़ने वालों की संख्या के आधार पर निकाला गया है ।Read More

यह जो जीवन है

शालू शुक्ला अच्छा आप एक काम करिए गूगल पर फलाने से जुड़ी तस्वीरें खोजिए। बेहतरीन तस्वीरें। बॉस ने अपने जूनियर से कहा। जूनियर पत्रकार ने गूगल पर तमाम तस्वीरें देखीं और सभी को नाम सहित एक फोल्डर में सहेजा। बॉस ने अगले दिन फोल्डर देखा। डिजाइनर के साथ मिल कर पेज तैयार करवा लिए गए। […]Read More

क्रांतिकारी विचारक और कवि ‘ गुरू रैदास ‘

मन चंगा तो कठौती में गंगा‘ कहने वाले रैदास बनारस के मंडुआडीह नामक एक गाँव मे रघुराम के घर पैदा हुए थे,इनकी माता का नाम करमा देवी और पत्नी का नाम लोना देवी था। हालाँकि कुछ लोग कतिपय कारणों से गुरू रैदास को पश्चिम भारत का भी मानते हैं । रैदास के जन्म के बारे […]Read More

विमलेश गंगावार ‘दिपि’ की कहानी ‘ रिश्तों के उस पार

[लेखिका ,संस्कृत की भूतपूर्व प्रवक्ता हैं । इनके तीन उपन्यास और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ।विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी कहानियाँ ,कविताएँ और लेख प्रकाशित होते रहते हैं ।] मेन मार्केट का चौराहा पार कर लगभग बीस मीटर दायें नवीन जी का घर है। दिल्ली का पाॅश इलाका, अगल-बगल भव्य गगनचुम्बी इमारतें। […]Read More

रचना चौधरी का लेख ‘ प्यार निभाना…. खुद से’

{कोलकता की  युवा कवयित्री रचना चौधरी सिर्फ कविताएँ ही नहीं बल्कि कहानी लेखन में भी रुचि रखती हैं।आठ लेखकों द्वारा लिखित साझा उपन्यास ‘ज़िन्दगी है हैंडल हो जाएगी ‘ का सहलेखन और संपादन भी कर चुकी हैं ।} कई बार ऐसा होता है कि आप किसी सिचुएशन में बेहद परेशान या दुखी होते हैं ! […]Read More

बस्ती छूट गयी

दीपक भारद्वाज ‘वांगडु ‘ जिम्मेदारी के बोझ तले सारी मस्ती छूट गयी चार पैसे कमाने जो निकले वो सुहानी बस्ती छूट गयी वो छोटा सा गांव ठंडी पीपल का छांव वो नदी का किनारा हमारे बचपन का सहारा वो यारो की टोली मिश्री सी बोली वो प्यारा सा स्कूल को कैसे जाऊं भूल सबकुछ तो […]Read More