सबके साथ होने को सहर कहें या गुमनाम होने को रात कहें 2019 की भीड़ में अकेलेपन की तलाश या 2020 में अकेलेपन का साथ करें आओ बात करें नकारात्मक बातों का अतिचिंतन करें या शेयर अपने जज़्बात करें डिप्रेशन रूपी विदाई को याद करें या फ़ोन पे वर्चूअल बारात करें आओ बात करें एक […]Read More
👉उत्तर भारत के अंबेडकर कहे जाने वाले महामना रामस्वरूप वर्मा जी के जन्मदिन पर साथी मिशन फॉउंडेशन के इंजीनियर सुनील पटेल की शब्दांजलि । ————————––—————————————– “जिसमें समता की चाह नहीं, वह बढ़िया इंसान नहीं। समता बिना समाज नहीं, बिन समाज जनराज नहीं। सौ में नब्बे शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है। धन-धरती और राजपाट में, […]Read More
Tej Pratap Narayan There was a director who used to be very disciplined and honest .His only fault was that he wanted everyone under him to be like him .No body liked him because of this bad habits .He transfered many supervisory officials /section officers who were posted at a same station/section for longtime and […]Read More
मैं बडी क्या हो गयी दुश्मन ज़माना हो गयाएक मेरा ही बदन सबका निशाना हो गया कस रहें हैं फब्तियाँ सब राह में होकर खडेरोज उस रस्ते से सबका आना जाना हो गया तकते हैं यूँ घूर के जैसे मैं उनकी मल्कियतहर कोई मेरी नज़र का ही दिवाना हो गया कब तलक फेरूं निगाहें कब […]Read More
कवि कमल जी की पुण्यतिथि पर तेज प्रताप नारायण की श्रद्धांजलि । जैसे किसी बगिया से ख़ुशबूदार फूल का मुरझानारात के घनगोर अँधेरे में बिजली का गुल हो जानाया किसी गाड़ी के टायर से हवा निकल जानावैसे ही होता है किसी कवि कादुनिया से असमय चले जाना ।(तेज) एक कवि थे कामता प्रसाद ‘कमल ‘ […]Read More
२००७ , जयपुर,की तपती मई की दोपहरी में , मैंने परिक्षा भवन से बाहर निकल कर छाँव के लिए एक बरगद के पेड़ की शरण ली,तो पास ही तपती धुप में खड़े एक ठेले वाले पर नजर पड़ी और वहीं टीक गयी। संभवत: पेड़ के नीचे लगी स्थायी दुकानों और लोगों की भीड़ में ठेले […]Read More
रीना गोयल ….सरस्वतीनगर( हरियाणा) निपट गंवार था धीरु..बड़े बाप की बिगड़ैल औलादहुकूमत के सिवा सीखा ही नही कुछ..औरत को पांव की जूती समझता ।सब गांव वालों की आँख में चुभता पर मुखिया के डर से कोई मुह न खोलता..लेकिन आज तो हद हो गयीखेत में सरजू की बिटिया चमकी को अकेला देख खूब मर्दानगी दिखाई […]Read More
आशीष तिवारी निर्मल लालगांव,रीवा,मध्यप्रदेश जी हाँ !बिलकुल सही पढ़ा है आपने! खुद के द्वारा किए गए एक शोध से यह कहने में मुझे कोई गुरेज नही कि यह दुनिया सिर्फ और सिर्फ मख्खनबाजी और बेईमानी की बुनियाद पर टिकी हुई है! दुनिया में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति में मख्खनबाजी और बेईमानी का गुण विद्यमान है चाहे […]Read More
आज सुबह से ही चौधरी काका के चेहरे पर उदासी की पीड़ा और निराशा झलक रही थी। कुछ बताया तो नहीं पर, बिना खराई किए, सुबह से ही बाबू जी की बैठक मे अकेले ही हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे । कई बार कुरेदने पर भी सिर्फ चुप रह गये थे।आज तो काकी ने भी सुबह […]Read More
[ पिता] बारिश की मार में, छाते कि तरह, ठिठुरती ठंढ में , गर्म कंबल की तरह, गर्मियों की लु में, शीतल जल की तरह, कड़कती धूप में, घनी छांँव की तरह, मकान की दिवारों में, मजबूत छत की तरह, और हर कठिन राह में, जो बनकर कंधा , सबका सहारा होता है वो एक […]Read More