कर्मचारी हूं

 कर्मचारी हूं

युवा कवि और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्नातक ,टाटा पावर में कार्यरत पंकज पटेल ‘प्रयाग ‘ की कविताएँ आधुनिकताबोध की समसामयिकता वाली कविताएँ हैं जिसमें तत्कालीन समाज का दर्द दिखाई पड़ता है ।।

कर्मचारी हूँ
रोज नौकरी करने जाता हूँ |
सुबह आशाओं की पुड़िया जेब में डाल,
किसी की पढ़ाई बीमारी शादी कर्ज जैसे फ़र्ज़ पूरा करने जाता हूँ ||
कर्मचारी हूँ ,
आठ घंटे मेहनत करने जाता हूँ ||
.
खोली चौल एक या दो कमरे के मकान,

साइकिल मोटरसाइकिल बस मेट्रो कार ,
तो कभी ग्यारह नंबर को अपना वाहन बनाता हूँ |
कर्मचारी हूँ ,
घर पे रोज शाम को वापस आने का वादा कर के जाता हूँ ||
.
पेन ,फाइल ,लैपटॉप और हेलमेट ,
इस तरह की चीज़ों से रोज अपना शारीरिक श्रृंगार करता हूँ |
कर्मचारी हूँ ,
मैं रोज पैसे कमाने जाता हूँ ||
.
तिरस्कार फटकार जातिवाद धर्मवाद ,
इस तरह के प्रकांड रोज सुनने और सहने जाता हूँ |
कर्मचारी हूँ ,
मैं तो बस केवल अपने काम से जाना जाऊँ बस ये चाहता हूँ ||
.
भ्रष्टाचार शिष्टाचार व्यभिचार ,
इन सब से लबरेज हो के भी कमल बन के तैरता रहता हूँ |
कर्मचारी हूँ ,
मैं तो बस केवल कर्म का खाता हूँ ||
………कर्मचारी हूँ ……
—प्रयाग ।*।*