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E-Zindagi आ गले लगा ले

तेज प्रताप नारायण चार कविता संग्रह, दो कहानी संग्रह और एक उपन्यास के लेखक तेज प्रताप को प्रेम चंद सम्मान,मैथिलीशरण गुप्त सहित कई अन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है ।उनका पहला व्यंग्य संग्रह , ज़ीरो बटा सन्नाटा, और दूसरा उपन्यास प्रकाशन के विभिन्न चरणों में है।एक कहानी संग्रह , एक कविता संग्रह और एक […]Read More

डॉ शिवेंद्र कुमार मौर्य की अवधी कविताएं

डॉ शिवेन्द्र कुमार मौर्यपूर्व शोध छात्र, हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालयसंप्रतिः शिक्षक, श्री रणंजय इंटर कॉलेज,अमेठी, उत्तर प्रदेश।संपादक: “उन्मेष” अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकामो नं 8004802456 [ राम राज आइ गवा ] राम कै चोला राम कै झोला राम नाम कै डंडीराम नाम से देश चलावै सच मा बा पाखण्डी।जनता मूरख बाटै पूरक अंधभक्ति मा चूरसोचिस अब […]Read More

बुद्ध

तेज प्रताप नारायण जितना अंदर से हम शुद्ध होते हैंउतनी मात्रा में हम बुद्ध होते हैं जो हम खोजते बाहर हैंवह हमारे अंदर हैजिसको हम समझते झील हैंवह चेतना का समंदर हैजिसमें मिलेगीबुद्ध की करुणाचारों आरिय सत्यअष्टांगिक मार्गपंचशील सिद्धांतमिट जायेंगे सारे भेदप्रिय हो जायेगी प्रकृतिसमस्त जंतु जीव बड़ा सरल मार्ग हैबुद्धत्व कासम्यक तत्व का करुणा […]Read More

My Covid Story

Tej Pratap Narayan About the author :(The writer is a well known name of Hindi literature .There are several books of poetry ,short stories and Novel to his credit .He has received many prestigious awards such as Prem Chand Award for his story book ,Kitne Rang Zindagi Ke and Maithili Sharan Gupt Award for his […]Read More

दोस्त की फीस

ये मुकेश कौन है ? – स्कूल की प्रधानाचार्य कक्षा ३ ख में घुसते हुए बोली। स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती पांडेय मैडम स्कूल में अनुशासन बनाये रखने के लिए बहुत सख्त है। जिसकी वजह से यह स्कूल पिछले दस सालों से ज़िले के सभी स्कूलों में अपना स्थान शीर्ष पर बनाये हुए है। जी मैं […]Read More

खेतों की पगडंडियों से गुज़रती किसान कवि लक्ष्मी कान्त मुकुल

सतीश कुमार सिंह ,समीक्षक,छत्तीसगढ़ छायावाद और छायावादोत्तर काल से लेकर समकालीन हिंदी कविता तक लंबी कविताओं का एक दौर चलता रहा है और आज भी नये पुराने सभी रचनाकार समय समय पर इसमें हाथ आजमाते रहे हैं । इसमें कोई दो राय नहीं कि इन लंबी कविताओं में कथ्य की नवीनता , भाषा और भाव […]Read More

लक्ष्मीकांत मुकुल की कविताओं में प्रकृति से साहचर्य की परिणति

लक्ष्मीकांत मुकुल हिंदी के उन कवियों में से हैं जिनकी चेतना किसान जीवन के कठोर यथार्थ से उत्पन्न है.जब अधिकतर कवि शहरी जीवन के इर्द-गिर्द उत्पन्न घुटन,टूटन और बिखराव को अपनी कविता के अंकुरण के लिए आधार-भूमि बना रहे वहीं लक्ष्मीकांत मुकुल किसान,किसानी,फसल और किसान और फसलों के मारे जाने का दर्द एवं टीस को […]Read More

कवि होने के दम्भ से दूर प्रतिरोध के कवि लक्ष्मीकांत

विजय सिंह बंद टाकीज के सामने जगदलपुर ( बस्तर) छत्तीसगढ़ कविता का जनपद सुनिश्चित करने का समय है! इस समय जब कवि होने की होड़ में कविता की मिट्टी, कविता का जनपद कवि के जीवन में न हो तब चिंता स्वाभाविक है । हिन्दी कविता का जनपद अपनी पूरी आभा, ताप और संघर्ष के साथ […]Read More

कल्पना

“कल्पना” चौराहें से गुज़री ज्यों ही एक लड़की उसका रंग रूप लावण्य देख भीड़ की नजरें भड़की किसी ने उसको लेकर पत्नी प्रेमिका प्रेयसी की आस लगायी किसी ने निर्लज़्ज़ता की सीमा औऱ बढायी कल्पना में ही नारी की गरिमा इतनी गिरायी कल्पना काश किसी ने ऐसी भी की होती इतनी सुनयना मेरी भगिनी होती […]Read More

राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिन पर उनकी किताब के कुछ अंश

साभार :सीमा पटेल ,कवयित्री, दिल्ली दिमागीगुलामी हैप्रगति में_बाधक जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसकी मानसिक दासता के बंधन भी उतने ही अधिक होते हैं. भारत की सभ्यता पुरानी है, इसमें तो शक ही नहीं और इसलिए इसके आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावटें भी अधिक हैं. मानसिक दासता प्रगति में सबसे अधिक […]Read More