मर्ज़ान -अफगानी युद्ध का चश्मदीद गवाह बब्बर शेर

डॉ आरके सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ एवम साहित्यकार वह युद्धों, आक्रमणों, घेराबंदी और यहाँ तक कि एक ग्रेनेड हमले तक से बच गया, लेकिन काबुल के बहादुर बब्बर शेर मर्ज़ान ने आखिरकार एक ऐसे दुश्मन के आगे घुटने टेक दिए, जिसे आज तक कोई हरा नहीं सका: बुढ़ापा।अपने 23 वर्ष के अफगानी जीवन में वह गवाह […]Read More

जीवन-यान की पायलट

सीमा पटेल,दिल्ली स्त्रियों के अब आंसू नहीं बहतेबहते भी है तो नज़र नही आतेसमझ आ गया है उनकोअपने आसुंओ का मोल बना देते है ये आँसूस्त्री के व्यक्तित्व को कमज़ोरहो कोई भी वज़हनहीं बहाती है अब ये आँसूबना लिया है अंतर्मन कोपहले से ज्यादा सुदृढ अब लड़ती हैं जूझती हैंऔर फिर जीतती हैंविषम परिस्थितियों सेअपनी […]Read More

गाँवनामा : धरणी के रंगरेज किसान

कल्पना कीजिये आपके हाथ में एक कूची, कई प्रकार के रंग और एक कैनवास है | आपको एक चित्र बनाना है, आप सबसे पहले किसका चित्र बनायेंगे? आप सोच रहे होंगे कि मैं नदी, पर्वत, झरना, सागर, स्त्री जैसे अनेकानेक विषयों में से कोई एक विषय के बारे में कह रहा हूँ, ऐसा बिल्कुल नहीं […]Read More

रक्षा बंधन

लेखक परिचय :विमलेश गंगवार ‘दिपि’ संस्कृत की पूर्व प्रवक्ता हैं ।इनके चार उपन्यास और दो कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। प्रस्तुत है इनकी एक लघु कथा। जया राखी बांधने आई थी अपने इकलौते भाई विक्रम को । पता नही इस बार चार दिन पहले क्यों आ गई ।शायद नियति ले आई थी । वरना […]Read More

मुक्तिबोध, राजनादगाँव और ब्रह्मराक्षस अथवा यक्षोन्माद का सत्य

सुशील द्विवेदी 1. स्मृति का खेल भी बड़ा निराला है | कई बार लाख कोशिशों के बाबजूद भी तथ्यों का स्मरण नहीं होता है | अगर स्मरण हो भी जाये तो सीधे-सीधे नहीं, बल्कि आड़े-तिरछे, भ्रमित तथ्य मानस में उभरते हैं | आप कहेंगे कि यह निरापागलपन है या किसी प्रकार की व्याधि है | […]Read More

फ़लसफ़ा ज़िन्दगी का

राधा कुमारी,दिल्ली जब कभी लगता है जान गई हूं तुम्हें ऐ जिंदगी… तब अचानक से तुम लौट के आ जाति हो… ये केसी कश्मकश है ये केसा फासला है…की… जिसमे तुम्हें चाहने का भी दिल है और कभी रूठ जाने का भी…. कभी रंगीन तुम इन्द्रधनुष के जैसी …. कभी बेरंग बनकर मुझे सताती हो…. […]Read More

संगठन शक्ति

©ज्ञान प्रकाश चौधरी,बहराइच एक वन में बहुत बडा अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डरकर भाग खडे होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था। एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे […]Read More

खोई हुई बहू

©तेज प्रताप नारायण राम सुख इलाहाबाद के एक थाने में अपनी बहू की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने आए थे ।थाना-पुलिस ,कोर्ट-कचहरी और डॉ-अस्पताल से सदा दूर रहने वाले राम सुख की ज़िन्दगी में यह दिन आएंगे उन्होंने सोचा न था । पर मज़बूरी का नाम महात्मा गाँधी ,राम सुख करते तो क्या करते । राम […]Read More

चमचा पुराण

तेज प्रताप नारायण अथ श्री चमचा जी की कथा यह कथा है स्वार्थ की ,परमार्थ की विश्वास की सारथी जिनके बने हैं अपने चमचा नाथ जी अथ श्री चमचा जी की कथा अथ श्री चमचा जी की कथा श्री चमचा जी भगवान का नाम स्मरण करके चमचा पुराण का प्रारंभ करता हूं ।दुनिया के सारे […]Read More

मुंशी प्रेमचंद को याद करते हुए

डॉ अनुराधा ओस मुंशी प्रेमचंद को स्मरण करना एक युग को स्मरण करना है, वे हिंदी साहित्य का एक युग थे ,31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही नामक गाँव में जन्मे मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य जगत में नई परिपाटी को जन्म दिया।प्रेमचंद का नाम धनपत राय था वे नवाबराय के नाम से लिखते […]Read More