जाति न पूछो साधु की

जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञानमोल करो तरवार की,पड़ा रहन दो म्यान । यह बात कबीर जी ने कही थी ।उन्होंने न कभी अपनी जाति बताई और न जाति छुपाई लेकिन लोगों ने उनकी जाति खोज कर बता दी कि वह फलाना जाति की विधवा स्त्री के पेट से पैदा हुए थे क्योंकि […]Read More

#कहानी #आधा सच #विश्व ऐड्स दिवस पर रचना चौधरी की

#### आधा सच #### काफी देर तक रिपोर्ट्स को पूरी तफ्शीश के साथ पढ़ने के बाद डॉक्टर ने अपना चश्मा थोड़ा सीधा करते हुए गहरी सांस छोड़ी | फिर अम्बर और तोरल की ओर मुखातिब होते हुए बोले….. ” अम्बर आपकी रिपोर्ट्स नार्मल हैं , यू आर कम्प्लीटली फिट | बट तोरल… यू.. यू… यू […]Read More

मुझे आश्चर्य होता

तेज प्रताप नारायण उग आयें हैं हर चौराहे परकुकुरमुत्ते की तरह बाज़ारजिसमें है बिचौलियों की भरमार खरीद केंद्रों पर कमीशनखोरी के अनगिनत अजगरजो मुँह बाये खड़ें हैंमेहनत के फल को निगल रहे हैं सामाजिक ,सांस्कृतिकराजनीतिक,प्रशासनिक भ्र्ष्टाचार के दबाव मेंबिकती रहती हैं फ़सलें सस्ते भाव में लेकिनमंडी तक पहुँचते ही फसलों में सुर्खाब के पर लग […]Read More

संविधान निर्माता

सीमा अहिरवार,इंदौर बाबा साहेब अमर रहें । जिन्दा हैं हमारी नस्लों में । नवजीवन की फसलों में । बाबा साहेब अमर रहें । तेज वही है ,जोश वही है । जीवन का उद्देश्य वही है । जिन्दा हैं हमारे जज्बों में। बाबा साहेब अमर रहें । दर्द वही है, प्रीत वही है । जीवन का […]Read More

अनजान रिश्ता

कौन सा रिश्ता है ,तुमसे पता नहीं कौन हो तुम ये भी मैं जानता नहीं तुम्हारी हँसी ही मेरे होठों की हँसी है तुमसे क्या रिश्ता है ये भी जानता नहीं जिस पल ना देखूं दिल बैचेन रहता है क्यों तुम्हे देखे बिना दिल मानता नहीं चोट तुम्हें लगती है दर्द मुझको होता है ऐसा […]Read More

संविधान दिवस

तेज प्रताप नारायण गर एक रथ है हिंदुस्तानतो सारथी है संविधान गर एक वृक्ष है भारत देश येतो जड़ है उसकी संविधान संविधान है सम -विधानहर समस्या का है निदान जिसके लिए हैं सब समानन निम्न कोई ,न कोई महानन हिन्दू कोई, न मुसलमानसबकी गरिमा ,सबको सम्मानदेता है सिर्फ संविधान आज़ादी देता जो अभिव्यक्ति कीरक्षा […]Read More

कडुंवा रोग: चावल उत्पादन में एक गंभीर समस्या

धान या चावल एशिया एवं विश्व के बहुत से देशों का प्रमुख भोजन है। धान उत्पादन लाखों परिवारों के आय मुख्य का साधन है तथा इसके उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश के वैज्ञानिक धान की पैदावार को बढ़ाने के लिए नित्य नई प्रजातियों […]Read More

बस्तियां

सीमा अहिरवार, इंदौर उजाड़ बस्तियां , फिर से बसा दो, देखो ना । न जाने कौन से, सितारे हैं, उनकी आंखों में । ये कैसे धूल के, बबंडर हैं देखो ना । छुपी हों बारिसे जैसे, हवा के झोंको में । करीब अश्क हैं , आंखों की मेरी कोरों में । न जाने कौन से […]Read More

आपसी प्रेम

सीमा पटेल ,दिल्ली तुम पुरुष से नाहक हीझगड़ती होउसके संरक्षण कोपितृ सत्तात्मकता समझलड़ती होउसके स्वाभिमान को अहंकार समझ भेदती होउसके गौरव को दंभ मानकररौंदती होउससे अनुगृहीत सौगातों कोपरम्परा समझतोड़ती हो । तुम्हें नहीं पतावो तो निरा मूर्ख हैतुम्हारे प्रेम में पागल हैतुमको ही अपने अस्तित्व मेंसमाये हुए हैतुमको ही अपने प्रेम मेंडुबोये हुए है। लेकिन […]Read More

रचना चौधरी का लेख

दहेज के लिये हुई हत्याएँ हों, बलात्कार हो या मानसिक अथवा शारीरिक प्रताड़ना से उपजी आत्महत्यायें हों। स्त्री जीवन की इन तमाम त्रासदियों को देखने- सुनने के बाद अमूमन हम सभी निकल पड़ते हैं दोषी को ढूंढने। पर वास्तविकता में कुछ दोष ऐसे होते हैं जिसे किसी अकेले के मत्थे नहीं मढ़ा जा सकता। यहाँ […]Read More