डायरी का पीला वरक़: प्रेम का एक वृहद आख्यान

कविता संग्रह: डायरी का पीला वरक लेखक: सुशील द्विवेदी मार्क्स ने धर्म को अफ़ीम कहा था ।लोग धर्म के अफ़ीम के नशे में इतना गुम हो गए हैं कि उन्होंने ख़ुद को विस्मृत कर दिया है कि वे अफीम नहीं ,वे धर्म भी नहीं हैं बल्कि एक इंसान हैं और इंसान होने के नाते उनके […]Read More

वन्यजीव संरक्षण में नवीन तकनीक का महत्व

–डॉ आरके सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ वन्यजीव विभिन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियों से खतरे में हैं, जैसे निवास स्थान विनाश, अवैध वन्यजीव व्यापार, इनवेजिव प्रजातियों और बीमारियों का प्रसार, और इससे अधिक पृथ्वी की जलवायु पर मानव का प्रभाव, जो जंगली आवासों की प्रकृति को बदल रहा है। प्रौद्योगिकी में प्रगति वैज्ञानिकों और आम जनता को […]Read More

विश्व संगीत दिवस

🟥 विश्व संगीत दिवस से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी – ▪️विश्व संगीत दिवस सम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। ▪️विश्व संगीत दिवस को “फेटे डी ला म्यूजिक” के नाम से भी जाना जाता है। इसका अर्थ है “संगीत उत्सव”। ▪️विश्व संगीत दिवस के अलावा इसे संगीत समारोह के रूप में […]Read More

जय शिवाजी

वो एक मराठा वीर था,“जय शिवाजी”जो ना किसीसे डरता था,“जय शिवाजी”भारत माँ का वो लाल था,“जय शिवाजी”जो कभी ना झुकता था।“जय शिवाजी”जीजाबाई का वो दुलारा था,“जय शिवाजी”शाहजी राजे की आंखों का वो तारा था,“जय शिवाजी”शिवनेरी में वो जन्मा था,“जय शिवाजी”सोलह सौ तीस का वो फ़रवरी महीना था,“जय शिवाजी”भालों से वो खेला था,“जय शिवाजी”सोलह साल में […]Read More

पावस की रात

लिख देती थी अक्सर तुम पर …. बारिश की बूंदो सी तरंग कभी बहते हुए झरने की उमंग और कभी सावन की सतरंगी झलक अक्सर लिख देती थी तुम पर…. तो कभी तपते सूरज सा विदग्ध वियोग पावस की रात का नीरव संयोग और कभी छिटकती चांदनी सी तुम्हारी,शर्मीली मुस्कान लेकिन अब नहीं लिखी जाती […]Read More

कविताएँ

1.हम और तुम कुछ और कविताएँ लिखूँगी मैं पलाश पर तुम आसमान की कानात के नीचे रंग भरते रहना और देते रहना थपकियाँ मेरी आवाज़ को यूँ ही …. शाम रोज ऐसे ही अंगड़ाई लेगी सूरज धीरे -धीरे ऐसे ही अपनी गश्त पूरी करता रहेगा तुम यूँही बोते रहना मुझे अपने मन के ज़मीन पर […]Read More

आग़ाज़ ए सुख़न ने पूरे किए सौ एपिसोड

परिवर्तन साहित्यिक मंच के कार्यक्रम आग़ाज़ ए सुख़न ने 19.06.22 को सौ एपिसोड पूरे कर लिए। 100 हफ़्तों से हर रविवार को होने वाले इस कार्यक्रम में देश- विदेश के सैकड़ों कवियों-कवयित्रियों ने सहभागिता की है । परिवर्तन साहित्यिक मंच “आग़ाज़ ए सुख़न ” के अलावा भी कई ऑफ़लाइन और ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करता रहता […]Read More

वीरों के वीर व्हाट्सएप वीर

तेज प्रताप नारायण लोग कहते हैं कि आजकल वीरों का सीज़न है ।तरह तरह के वीर सामने आ रहे हैं ।अग्नि वीर ,हड़ताल वीर ,क्रांति वीर और न जाने क्या क्या ?दो साल पहले मैंने संजीव गंगवार जी की व्यंग्य की किताब पढ़ी थी व्हाट्सएप वीर । उस किताब से याद आया कि अपने देश […]Read More

जलवायु परिवर्तन और उसके खतरे

डॉ वेदब्रत गंगवार,उपनिदेशक उत्तर प्रदेश सरकार यद्यपि हम अक्सर मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन के बारे में सोचते हैं कि भविष्य में क्या होगा, यह एक सतत प्रक्रिया है। भारत और दुनिया भर में पारिस्थितिकी तंत्र और समुदाय आज प्रभावित हो रहे हैं।विशिष्ट जलवायु और मौसम संबंधी घटनाओं का एक उल्लेख करें तो क्या मिलता है: बाढ़, […]Read More

आम जन जीवन से से जुड़ा व्यंग्य संग्रह ज़ीरो बटा

संगीता , दिल्ली विश्वविद्यालय सामाजिक,वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, प्रेम – परिहास आदि विषयों पर किताबें लिखी जाती रही हैं | परन्तु इन सभी विषयों को एक साथ पाठकों के सामने बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है – तेज प्रताप नारायण जी ने | तेज प्रताप नारायण जी द्वारा लिखित पुस्तक ‘ज़ीरो बटा सन्नाटा’ […]Read More