जब आम आदमी पर ज़ुल्म होता था, तो बेचैन हो जाते थे , पूर्व मंत्री चेतराम गंगवार जी

 जब  आम आदमी पर ज़ुल्म होता था, तो बेचैन हो जाते थे , पूर्व मंत्री चेतराम गंगवार जी

यू पी के पूर्व मंत्री ,स्मृतिशेष चेत राम गंगवार जी पर उनकी सुपुत्री सुप्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार विमलेश गंगवार’दिपि’ का संस्मरण ।

शायद 1975 76 में देश में एक ऑधी चली थी परिवार नियोजन की । और फिर भयंकर तूफान शुरू हुआ नसबन्दी आप्रेशनों का ।इतनी सख़्ती बरती गई कि इतने केस लाओ तो तनख़्वाह निकलेगी ।जो केस नहीं ला पाये उनका वेतन रोक दिया गया ।
ऐसे माहौल मे जो मिला उसको ले आये ।यह भी नहीं देखा यह स्त्री विधवा है या अविवाहित है ।यह पुरुष अविवाहित है या बुजुर्ग है ।कर दिये गये आपरेशन ।
बरेली में भी यह ऑधी आई ।बलपूर्वक नसबन्दी आप्रेशन होने लगे।
पिता जी ( आदरणीय चेतराम गंगवार ) बहुत दुखी थे यह हाल देख कर ।मन ही मन परेशान जिस आम आदमी ने मंत्री बनाया उसी की मदद नहीं कर पा रहे ।कैसी शर्म नाक स्थति ????
उन दिनों मैंने देखा उनका चैन खत्म हो गया था और रात को सो भी नहीं पाते थे ।
अम्मा श्री मती सत्य भामा देवी जी उन्हें समझाती थीं क्यों परेशान होते हैं आप क्या कर सकते हैं इन हालात में ।
पिताजी कुछ नहीं बोलते और परेशान हो जाते ।उनकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी ।अगले दिन वह तत्कालीन मुख्यमंत्री जी के पास पहुंच गये और बोले
सर इस विपदा को रोकिये ।गरीबों पर अत्याचार हो रहा है ।कोई बड़ा अधिकारी या नेता तो आप्रेशन करवा नहीं रहा है न किसी को अनुचित आप्रेशनों का मलाल है ।सब बैठे बैठे मौज कर रहे है सरकारी कुर्सियां तोड़ रहे हैं बैठे बैठे …….. ……मेरी बरेली में देखिये अविवाहित युवक की नसबन्दी कर दी ……जांच करवाइये इस शर्मनाक कृत्य की
आप का दिमाग तो सही है कल इस विषय पर कितना समझाया था आपको ।यह केन्द्र से चल रही है योजना ।जनकल्याण के लिये देश के सुन्दर भविष्य के लिये ….
आप सरकारी योजना में व्यवधान डाल रहे हैं गंगवार साहब
गरीबों की छाती पर चढ़कर राजनीति करना मुझे समझ में नहीं आ रहा है माननीय तिवारी जी ।
अब आप अपने दायरे से बहुत आगे बढ़ रहे हैं ।आप जानते हैं आप को पार्टी से निकाला जा सकता है ! आप को पार्टी टिकट नही देगी चुनाव में !!
जाइये बरेली के D.M.से बात करिये
मैं क्यों करूँ ? आप आदेश दीजिये D.M. को । तत्काल बतायें उस गरीब युवक की नस बन्दी क्यों की ????
मैं फिर कह रहा हूँ सरकार के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर काम कीजिए ।आखिर आप एक जिम्मेदार मंत्री हैं ।
ऐसी सरकार के साथ काम नहीं करना मुझे !गरीब को प्रताड़ित करने वाली सरकार के कन्धे से कन्धा नहीं मिलाना मुझे ….
मत दीजियेगा टिकट मुझे
निकाल दीजियेगा पार्टी से मुझे
पर माननीय मुख्यमंत्री जी …..यह याद रखियेगा वोट आप की पाकेट में नहीं रखें हैं ।वोट देने वाले तो कहीं और ही है ।
यह लीजिये इस्तीफ़ा ।
मैं घर से लिख कर चला था ।
तेज कदमों से वह बाहर आ गये ।

संपादकीय टिप्पणी

राजनीतिक अवमूल्यन के युग में पूर्वमंत्री चेतराम गंगवार का जीवन अपने आप मे उदाहरण है। ग़रीबों की आवाज़ ऐसे व्यक्तित्व को परिवर्तन की ओर से कोटिशः नमन ।

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