मानसिकता

 मानसिकता

मानसिकता
वो कुछ अधूरा सा पहनती है,
वो ‘जीन्स टीशर्ट’ पहनती है,
रोकू कैसे खुद को ;उसे पाने से
बलात्कार ही तो किया था
गलती उसी की थी…।।

वो..कुछ अधूरा सा पहनती है
वो`ब्रा’ पहनती है
दिखती नहीं है , देख तो हम लेते है
आंखे अपनी कुछ शेक लेते हैं
आंखे ही तो डाली थी
गलती उसी की थी…।।

वो..कुछ अधूरा सा पहनती है
वो `साड़ी ‘पहनती हैं
हाथो से नोचने का ही तो मन किया था
नाभि उसकी,जो साडी में लिपटी है
नोच ही तो डाला था,
गलती उसी की थी…।।

वो …कुछ अधूरा से पहनती है
दोष मेरा नही …
वो ही खुल्ला घूमती है..।।

….हेमंत कुमार मित्र