मिर्ज़ापुर के पूर्व विधायक श्री यदुनाथ सिंह की बातें

 मिर्ज़ापुर के पूर्व विधायक श्री यदुनाथ सिंह की बातें

{राजेश पटेल }

मिर्ज़ापुर के पूर्व विधायक श्री यदुनाथ सिंह की कहानी ।परिवर्तन इस लेख में पूर्व विधायक द्वारा एस डी एम और दरोग़ा के साथ वार्तालाप के कुछ अंशों से असहमति प्रकट करता है ।

नाम यदुनाथ सिंह, काम-राजनीति, 56 बार जेल यात्रा, कट्टा भी चलाना नहीं आता लेकिन डरते थे बड़े-बडे माफिया। मिर्जापुर जिले के चुनार विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक चुने गए थे। जनता के लिए इन्होंने जितना संघर्ष किया, लोग उसे आज भी याद करते हैं। यह कहानी उनके जीवन की एक घटना भर है।
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बात चुनार की है। वर्ष 1980, दिनांक 31 दिसंबर। चुनार के एसडीएम थे मुकेश मित्तल । आते ही अपना रंग दिखाने लगे। उस वर्ष भयंकर सूखा पड़ा था। इसके बावजूद बकाएदार किसानों को पकड़वा-पकड़वा कर जेल भेजना शुरू किया। तमाम लोग यदुनाथ सिंह के पास आते थे और एसडीएम की शिकायत करते थे। मात्र छह माह पहले ही विधायक चुने गए यदुनाथ सिंह किसानों का उत्पीड़न किसी हाल में बर्दाश्त नहीं करते थे। वे एसडीएम को समझाने के लिए समय का इंतजार कर ही रहे थे कि एक दिन एसडीएम ने खुद मौका दे दिया।

मित्तल साहब जमालपुर क्षेत्र का दौरा करने के बाद तियरा-गौरही के रास्ते अदलहाट की ओर जा रहे थे। तियरा और गौरही गाँव के बीच कलवरिया नाला है। उस साल भयंकर सूखा पड़ा था। तियरा गाँव के उन्नतशील किसान लोकनाथ कुशवाहा के सहयोगी कलवरिया नाला में पंपिंग सेट लगाकर सड़क किनारे से नाली बनाकर अपनी फसल की सिंचाई करने की तैयारी में थे। एसडीएम मुकेश मित्तल ने सड़क किनारे नाली की खुदाई देखी तो वे बिफर गए। वहां मौजूद लोगों को काफी भला-बुरा कहा ,बोले ,यह कानून का उल्लंघन है। फावड़ा आदि के साथ सभी को अपनी गाड़ी में बैठा लिया और अदलहाट थाना ले आए। इसकी जानकारी लोकनाथ सिंह को मिली तो वे यदुनाथ सिंह पटेल के सहयोगी बजरंगी कुशवाहा से मिलने उनके घर गौरही गए। उनको सारी बात बताई। बजरंगी कुशवाहा तुरंत लोकनाथ कुशवाहा को लेकर थाना गए। वहां उस समय तक एसडीएम मौजूद थे।

कुशवाहा ने सूखे का हवाला देकर काफी अनुनय-विनय की, लेकिन एसडीएम के कानों पर जूं नहीं रेंगी। उन्होंने धारा 133 के तहत प्राथमिकी दर्ज़ करा दी। जमानतीय धारा होने के बावजूद एसडीएम ने थानेदार को निर्देश दिया कि किसी की भी जमानत थाने से न हो।

हारकर बजरंगी कुशवाहा और लोकनाथ कुशवाहा नरायनपुर स्थित विधायक के कार्यालय पहुंचे। उस समय विधायक यदुनाथ सिंह भोजन कर रहे थे। तब तक रात के करीब आठ बज चुके थे। विधायक जी ने कहा कि इतनी रात को कैसे? उनको पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई तो खाना छोड़कर हाथ मुँह धोया और पैदल ही नरायनपुर त्रिमुहानी पहुंचे। चूंकि न तो बजरंगी जी के पास कोई साधन था न ही विधायक जी के पास। त्रिमुहानी से ही बड़ा वाला टेंपो लिया और उसी में बैठकर अदलहाट की ओर चल दिए। रेलवे क्रासिंग पर पहुंचते ही सामने से एसडीएम की गाड़ी चली आ रही थी। विधायक जी ने इशारा करके तुरंत फाटक बंद करा दिया। नतीजतन फाटक के पास आकर एसडीएम की जीप रुक गई।

यदुनाथ सिंह व इनके साथ के अन्य लोग पैदल ही उस पार गए और एसडीएम से बताया कि वे इस क्षेत्र के विधायक हैं। यह सुनने के बाद भी एसडीएम न गाड़ी से उतरे और न ही शीशा का पर्दा हटाया। फिर बड़े ही शांत भाव से यदुनाथ सिंह ने पूछा कि आपके पास सरकार ने एक प्रोटोकाल लेटर भेजा है। इसमें लिखा है कि यदि क्षेत्र का विधायक आ जाए तो उसे आदर के साथ प्रणाम करते हुए कुर्सी से खड़े हो जाना चाहिए। एक और प्रोटोकाल आया होगा कि यदि एमएलए चाहे तो वह सरकारी गाड़ी से क्षेत्र का भ्रमण कर सकता है। आया है कि नहीं। इल सवाल पर एसडीएम भड़क गए और पर्दा हटाने के साथ ही कहा कि आया है।

इस पर यदुनाथ सिंह ने कहा कि मुझे अभी क्षेत्र के भ्रमण पर जाना है। आप किसी अन्य गाड़ी का इंतजाम करके चले जाएं। इस पर एसडीएम अचकचा गए। उनके साथ नायब तहसीलदार एसडीएम की अर्जेंसी बताने लगे तो यदुनाथ सिंह ने कहा कि आप बीच में न बोलिए, नहीं तो मुझे जानते हैं न। यहीं पर पेट फाड़कर सारा भ्रष्टाचार बाहर निकाल दूंगा। एसडीएम की स्थिति बहुत ही दयनीय हो चुकी थी। फिर यदुनाथ सिंह ने सवाल किया। कहा कि आपको पाँच जूते यहीं पर मारूं तो मेरा खिलाफ कौन सी धारा लगेगी। एसडीएम चुप। यदुनाथ सिंह ने कहा कि जूते मारने के लिए 323, गाली भी दे दूंगा तो 504 जुड़ जाएगा। आप जान से मारने की धमकी का भी आरोप लगा देंगे तो 506 भी लग जाएगा। बताइए ये सभी धाराएं जमानतीय हैं या नहीं। एसडीएम ने कहा कि जमानतीय हैं। यदुनाथ सिंह ने कहा कि फिर 133 कैसे गैरजमानतीय हो गई, जो आप थानाध्यक्ष को निर्देश दिए हैं कि जमानत न दी जाए। फिर एसडीएम को लेकर अदलहाट गए और उनके सामने ही लोकनाथ व उनके सहयोगियों की जमानत कराई।

इस घटना के बाद एसडीएम चुनार के बजाए सीधे मिर्जापुर गए और जिलाधिकारी को अपनी लंबी छुट्टी का आवेदन देकर चले गए। फिर चुनार लौटकर नहीं आए। अपना सामान लेने भी। और तो और, चुनार में ही एक अग्रवाल फेमिली में उनकी शादी की भी बात चल रही थी। यह भी पक्की नहीं हुई। रेलवे फाटक बंद होने के कारण की जांच के लिए कमीशन बैठा। काफी दिनों बाद जीआरपी का एक दारोगा यदुनाथ सिंह का बयान लेने आया तो उसने कहा कि मैं जांच करने आया हूं। यदुनाथ सिंह ने कहा कि पहले पानी पी लीजिए। फिर जांच करिएगा।

पानी पीने के बाद दारोगा ने फिर कहा कि जांच करने आया हूं। विधायक जी ने कहा कि खाना खा लीजिए। उसके बाद जो करना होगा करिएगा। यदुनाथ सिंह के साथ ही दारोगा ने खाना भी खाया। खाना खाने के बाद फिर उसने कहा कि जांच करने आया हूं। इस बार यदुनाथ सिंह अपने स्वभाव के अनुसार भड़क उठे और उस दारोगा को दौड़ा लिया। वह भागा, फिर वापस लौट कर नहीं आया। इसके बाद किसने जांच की, क्या रिपोर्ट रही, किसी को नहीं पता। थाने में भी एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मुकदमा चला था। लेकिन अभियोजन और आरोपित, दोनों की उदासीनता के कारण बाद में खारिज हो गया। अभियोजन की उदासीनता के बारे में किसी को नहीं पता। पता है तो सिर्फ और सिर्फ किसानों के लिए यदुनाथ सिंह पटेल की दिलेरी।