अब बीमारी या शायद मृत्यु दस्तक देने लगी थी उनके जीवन में (संस्मरण -11)

 अब बीमारी या शायद मृत्यु दस्तक देने लगी थी उनके जीवन में (संस्मरण -11)

यू पी के पूर्व मिनिस्टर स्मृतिशेष श्री चेतराम गंगवार जी पर संस्मरण की यह आख़िरी किश्त है । उनकी बेटी सुप्रसिद्ध उपन्यासकार /कथाकार श्रीमती विमलेश गंगवार ‘दिपि’ द्वारा लिखे गए सुंदर संस्मरण यशकायी श्री गंगवार के प्रति सच्चे श्रद्धा सुमन हैं । परिवर्तन भी ऐसे ज़मीन से जुड़े महान नेता को सादर नमन करता है ।

थोड़ी बहुत अस्वस्थता में वह बिस्तर पर नहीं लेटते थे ।बाग में चले जाते खेतों पर चले जाते ।इतने बड़े बाग में उन्हें पता था किस पेड़ का आम मीठा है ।
कुछ ज्यादा तबियत खराब होती तो घर के अन्दर लगे हुये चौंसा और तोता परी आम के पेड़ों के नीचे बैठे रहते ।और केला नीबू भिन्डी तरोई लौकी आदि पौधों की देख रेख करते ।मना करने पर भी नही मानते ।
एक बार बरेली में शायद सिद्धि विनायक अस्पताल में भर्ती थे ।बहुत लोग देखने आते थे ।
एक सज्जन आये और बोले ……” कैसे लेटे हैं अस्पताल में ! लगता ही नहीं इतने वर्षों राजनीति में रहे हो ।”

.वह गुस्से से उठ कर बैठ गये और ऊँची आवाज़ में बोले, “.तुम क्या चाहते हो ? घोटाले करता !गरीबों का खून पीता ! जेल होती !और तुम जेल में जाते मुझसे मिलने !”
“कपिल ( छोटा बेटा ) किसने भेजा इन्हें मेरे रूम में ।भगाओ इन्हें ।”
डाक्टर साहब गये और बोले ,” कुछ ही लोगों को अन्दर आने दीजिये ।इस समय इन्हें क्रोध नहीं करना करना चाहिए ।”
जब तबियत में सुधार नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद P.G.I.लखनऊ में admit हो गये लगभग दो महीने वहां रहे ।
समाचार पत्रों से पता चल ही गया था कि पी जी आई में भर्ती हैं ।
एक दिन माननीय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी इन्हें देख ने आये तो ऐसे खुश हुये मानों कोई छूटा हुआ पुराना साथी मिल गया हो ।काफ़ी देर बातें होती रहीं माननीय मुख्यमंत्री जी ने पूछा, ” कितना पैसा लग रहा है इलाज में ?”

पिता जी ने नहीं बताया और कहा …..
” बेटा चन्द्र पाल सब जमा कर देता है इस साल बाग ( की फसल ) भी अच्छा बिक गया था ।कोई दिक्कत नहीं है सर।”
माननीय मुलायम सिंह यादव जी बोले मैं जानता हूँ ,” आप कितने स्वाभिमानी हो गंगवार साहब । मैं जानता हूँ आपने अपने राजनीतिक जीवन में किसी से एक पैसा भी नहीं लिया है ।आपके पास पैसा कहाँ से होगा ?”
“अब मेरा भी कुछ कर्तव्य बनता है आप के प्रति ।मैं जो चाहूँ करने दीजिये ।”
“सर ! सोचिये जरा …….मैं ने सपा के लिये कुछ भी तो नहीं किया है ।हर चुनाव में आपकी पार्टी की जमकर खिलाफ़त की है ।आपके कैंडिडेट को हरवाया ही है मैने । “पिता जी बोले ।
“गंगवार साहब हर वक्त राजनीति की बात अच्छी नहीं लगती ।मैं आप का स्वास्थ्य जानने आया हूँ ।”
अब इलाज बहुत अच्छी तरह होने लगा । पूरा staff
बहुत अच्छी तरह ध्यान रखने लगा ।
वहीं भर्ती तीन मरीज पिता जी के पास आये और बोले , ” हमारी मदद कीजिए ।इलाज के लिये सरकार से पैसा दिलवा दीजिये ।”
पिता जी बोले आप लोग प्रार्थना पत्र लिख लाइये कोशिश कर के देखता हूँ ।
उनके हाथ आजकल कांपने लगे थे ।कांपते हाथों से तीनों application पर उन्होंने अपने हस्ताक्षर कर दिये कुछ दिनों में तीनों को पैसा मिल गया ।
वह तीनों तो खुश हुये ही पिता जी तो बहुत ही खुश हुये ।
पिता जी की हालत अब और खराब होने लगी थी ।माननीय मुख्यमंत्री जी ने दिल्ली जाने का by air इंतजाम भी कर दिया था …..
पर 11 दिसम्बर 2006 का वह मनहूस दिन ।
शाम लगभग 4 बजे ब्रेन हेमरेज से उनकी मृत्यु हो गई ।
सब पचपेड़ा आ गये पर वह नहीं आये ।उनका केवल शरीर आया ।
सपा सरकार के माननीय मुख्यमंत्री जी ने बरेली डी . एम .को कहा ,” पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ पचपेड़ा जाकर उनकी अंत्येष्टि में शामिल हों।”
12 दिसम्बर 2006 को अपने ही बाग में अम्मा की समाधि के पास अंत्येष्टि की गई ।
तत्कालीन D.M. भुवनेश कुमार जी ने एवं S.S.P. दुर्गा चरण मिश्र जी ने पुष्प चक्र चढ़ा कर ,उनके शरीर पर राष्ट्र ध्वज डाल कर एवं रायफलों से सलामी दिलवा कर अन्तिम श्रद्धांजलि अर्पित की ।
विशाल जन समूह उमड़ पड़ा अपने नेता के आखिरी दर्शन करने के लिये ………….
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