अमेरिका में रोज़गार वीज़ा पाना आसान

 अमेरिका में रोज़गार वीज़ा पाना आसान

शैलेन्द्र वागद्रे

लेखक परिचय :

इन्जी. शैलेन्द्र वागद्रे
बीई (सिविल) ऑनर्स, एनआईटी रायपुर 1982
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एमपीईबी सारनी (एमपी)
प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव: अखिल भारतीय अपाक्स ।

इनके परिवार में पत्नी श्रीमती विनीता वागद्रे और दो पुत्र अमन वागद्रे और आर्यन वागद्रे हैं ।

अमन ने , आई आई टी दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग में,B Tech और M Tech किया है । इसके बाद उन्होंने MS(Chemical Engg)
Carnegie Mellon University, America से किया है । वर्तमान में वे Maryland America में Data Scientist के रूप में कार्य कर रहे हैं ।

दूसरे पुत्र आर्यन वागद्रे , Pennsylvania State University,America में BS(computer science) final year में हैं ।

अमेरिका में रोज़गार वीज़ा पाना आसान

हमारे जो बच्चे बीई / बीटेक कर पुणे, बैंगलोर, हैदराबाद, गुरुग्राम में बहुत कम वेतन पर नौकरी करते हुए आज भी जीवन-यापन हेतु माता-पिता से घर से धनराशि मंगवा रहे हैं या रु. 6 लाख से 8 लाख खर्च कर इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर घर पर बेरोजगार बैठे हैं वे हिम्मत कर पीजी व रोजगार हेतु अमेरिका, कनाडा का रुख कर सकते हैं. जिसके लिए 30 से 50 लाख रुपए का एजुकेशन लोन बगैर ग्यारंटर व बगैर मकान के मिलता है.

अमेरिका में नौकरी की जुगाड़ ऐसे होती है-

(1) पीजी (MS/MTech) करते ही अमेरिका में 3 वर्ष की नौकरी अप्रेन्टिस (ट्रेनी) के रूप में आसानी से मिलती है. जिसमें काम पूरा व सेलेरी पूरी मिलने से आसानी से कर्ज पट जाता है. इस हेतु अमेरिका प्रारम्भ में ही बिना मांगे 5 वर्ष का स्टूडेन्ट वीज़ा दे देता है.

(2) इसके अलावा हर साल आने वाले लगभग 2 लाख आवेदनों में से 85,000 बच्चों को लॉटरी द्वारा 6 वर्षीय H-1-B जॉब वीज़ा दिया जाता है. अप्रेन्टिशिप-काल के तीन वर्षों के दौरान ही जिसके मिलने की पूरी संभावनाएं रहती हैं.

(3) इस प्रकार लगभग कुल 5 वर्ष की नौकरी के बाद वहाँ ग्रीनकार्ड का आवेदन चल पड़ता है. जिसकी जाँच के 2 – 3 स्तर पार हो जाने के पश्च्यात अमेरिका H-1-B जॉब वीज़ा के 6 वर्ष पूर्ण होने पर भी वहाँ नौकरी करने अनुमति देता रहता है.

अमेरिका के स्थानीय छात्रों का इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसी कठिन पढ़ाई की ओर रुझान कम रहता है. अतः हमारे लिए वहाँ अच्छे विषय व संस्थानों से उच्च शिक्षा व फिर रूपये 60 लाख औसत वार्षिक वेतन (जबकि रहने-खाने का खर्च रूपये 15 लाख प्रति वर्ष) की नौकरी प्राप्ति के अवसर सुदृढ़ रहते हैं. अमेरिका में STEM (Science, Technology, Engineering & Mathematics) Group के व्यक्तियों की कमी होने से अमेरिकी कम्पनियों में 60% लोग बाहर के देशों के काम करते हैं.

लगभग यही व्यवस्था कनाडा में भी है, यूरोप में नहीं।

(विशेष टीप: बच्चों के केरियर निर्माण बाबत यह मार्ग चुनने पर माता-पिता को बच्चों द्वारा बुढ़ापे में कराये जाने वाले सुखद ईलाज व फिर कन्धे के सुख का त्याग करना होता है)

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