उलझनें और उलझ रहीं थी -संस्मरण 9

 उलझनें और उलझ रहीं थी -संस्मरण 9

संस्मरण की यह श्रृंखला उ प्र सरकार के पूर्व मंत्री स्मृतिशेष चेतराम गंगवार जी पर है उनकी बेटी श्रीमती विमलेश गंगवार द्वारा लिखा गया है जो सुप्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार हैं । राजनैतिक पराभव के इस युग मे चेतराम जी का चरित्र और जनता के प्रति समर्पण अप्रतिम है । पूरा पढ़ने के लिए theparivartan.co.in पर उपलब्ध है।

अगले दिन शनिवार था ।शनिवार को पिता जी बरेली मकान पर सबसे मिलते थे ।बहुत भीड़ भाड़ वाला दिन ।पत्रकार बन्धुओं को जाने कैसे खबरें मिल जाती हैं ।सबेरे सभी ने माननीय तिवारी जी के आगमन की बात प्रमुखता से छापी थी ।
शनिवार को तमाम लोग आये थे अपने अपने काम लेकर ,उनके माध्यम से यह समाचार गाँव गाँव में फैल गया ।
अब फिर से असमंजस की स्थिति हो गई ।सबकी अलग अलग राय ,अलग अलग मशविरे । कुछ लोग कहते कांग्रेस में आ जाना चाहिए ।कुछ का विचार था कांग्रेस में नहीं आना चाहिए ।
पिता जी कहते ,” M.L.A. हूँ ठीक हूँ ।किसी दल में नहीं जाना ।बहुत चैन है ।विधानसभा का सत्र चलता है तो लखनऊ चला जाता हूँ । बाकी दिनों में बरेली और पचपेड़ा रह लेता हूँ । राजनीति की उठा पटक में बड़ा टैन्शन है ।अच्छा हुआ मुझे जल्दी सीख मिल गई ।”
हर शनिवार को लोग आते रहे ।और यथाशक्ति उनके काम भी होते रहे ।और इस गरम मुद्दे को भी हवा मिलती रही ।
जो लोग कांग्रेस में लाना चाहते थे वे कहते ,” माननीय तिवारी जी ठीक तो कहते हैं कि घर में क्या लड़ाई झगड़े नही होते हैं,तो क्या घर छोड़कर भाग जाता है कोई ।”
एक दिन माननीय तिवारी जी के P.A. से सूचना मिली कि तिवारी जी नैनीताल जा रहें है फलां दिन ।दोपहर को पचपेड़ा में विश्राम करेंगे ।
यह खबर भी गाँवों में फैल गई ।
उस दिन अनेकों लोग सुबह से ही पचपेड़ा घर पर इकट्ठा होने लगे ।अपने समय पर माननीय तिवारी जी भी आ गये ।सब लोगों के साथ साथ माननीय तिवारी जी ने भोजन किया और फिर मुख्य मुद्दे पर आ गये ।
“चेत राम जी अब बहुत समय गुजर गया । बताइये पुनः कांग्रेस कब join कर रहे हैं ?”
एक बहुत प्रतिष्ठित नबावगंज वासी उठ कर खड़े हो गये और बोले
“माननीय तिवारी जी यह क्या बतायेंगे ?अगर यह बताते तो अब तक बता न देते ।हम सब ने मिल कर बहुत सोच समझ कर निर्णय कर लिया है ।”
“अरे वाह क्या बात है,बताइये बताइये तिवारी जी बोले ।”
“जिस जगह से इन्होंने इस्तीफा दिया है उसी जगह पर इन्हें बिठाइये । तब कांग्रेस join करा दीजिये ।”
“अरे अरे यह कैसा निर्णय ले लिया आप लोगों ने ।”, पिता जी बोले ।
“हमने सही निर्णय लिया है ।अगर तुम्हें नहीं मानना है तो हमारा तुम्हारा नाता खत्म ।”
“तुम नबाव गंज के लिये नहीं और नबावगंज तुम्हारे लिये नहीं ।”
दादी और अम्मा पिता जी से ज्यादा महत्वाकांक्षी थी इस निर्णय से वह बहुत खुश हुईं ।
पिताजी अब क्या बोलते !!
“नबावगंज के क्या तल्ख मिज़ाज है भाई ! “
“जैसे चेतराम जी वैसा उनका नबावगंज ! “, माननीय तिवारी जी बोले ।
और फिर आ गये कांग्रेस में ।मंत्री बनें ।कृषि ,टैकनीकल एजूकेशन,डेरी पशुधन बीस सूत्रीय कार्य क्रम आदि विभागों की जिम्मेदारी मिली ।
पिता जी की राजनीति में बड़े-बड़े नाटकीय क्षणों को आते जाते देखा हम लोगों ने ।

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