दक्षिण पूर्व एशिया की संस्कृति में रामायण की भूमिका

 दक्षिण पूर्व एशिया की संस्कृति में रामायण की भूमिका

अनिता चंद

(यह लेखक के अपने विचार हैं )
इतिहास का संक्षिप्त विवरण
उत्तर भारत में नवरात्रि दशहरे के समय रामलीला का बड़ा महत्व है, सभी जगहों पर रामलीलाऐं प्रस्तुत की जाती हैं। हम सभी राम-लीलाओं से अच्छी तरह अवगत हैं।
रामलीलाएँ “रामायण” ग्रंथ पर आधारित है।
आपको जानकर ख़ुशी होगी ! कि रामायण ग्रंथ हमारे देश का ही नहीं बल्कि दक्षिण- पूर्व एशियाई देशों का भी महत्त्वपूर्ण साहित्यिक ग्रंथ है।

दक्षिण पूर्व एशिया की संस्कृति में रामायण: इतिहास में ऐसा लिखा गया है कि रामायण को इंडोनेंशिया में 732-1000 AD के बीच मेदांग राज्य में लिखा गया।

क्षेत्रिय भाषा में इसे (Kakawin) काकाविन यानि रामायण कहा जाता है।
वैसे तो मध्य काल में दक्षिण पूर्व ऐशिया में बौद्ध धर्म प्रचलित था।
लेकिन रामायण के क्षेत्रिय भाषा में लिखने पर हिन्दू धर्म का जैसे पुनर्जन्म हुआ।
भारतीय व्यापारी जब पहली शताब्दी के आस-पास दक्षिणपूर्वी एशिया गये तो अपने साथ रामायण भी ले गये। इंडोनेशिया के लोगों ने रामायण को बहुत पसंद किया और इसे अपनी संस्कृति में अपनाने की मान्यता दी।
इंडोनेशिया की लड़कियों ने रामायण को यहाँ के प्रसिद्ध नृत्य लेगोन
के माध्यम से प्रस्तुत किया और आज भी करती आ रही हैं।

रामायण प्राचीन भारत का पौराणिक ग्रन्थ है। जैसा आप सभी को विदित है कि रामायण एक राज परिवार की कहानी है जो पति-पत्नी भाई-भाई तथा परिवार के आपसी रिश्तों के आदर्श पहेलुओं को व्यक्त करती है। इस ग्रन्थ के अन्त में बुराई पर अच्छाई की जीत होती है।
रामायण के आदर्श देश की सीमाओं को लाँघकर दक्षिण पूर्वी एशिया में जैसे-
बर्मा, इंडोनेशिया, लाओस, फ़िलीपींस, थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम, देशों की संस्कृति में मिलते हैं

महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा संस्कृत भाषा में ‘रामायण’ का संकलन लिखा
गया ।देशों में इस संस्करण को वहाँ की क्षेत्रिय भाषाओं में अनुवादित किया गया।

रिमकर- (Reamker) कम्बोडिया का महाकाव्य है इसका अर्थ है
“ग्लोरी ओफ़ रामायण” लोग इस महाकाव्य पर अपने त्योहारों पर नृत्य करते हैं। रिमकर के दृश्य कम्बोडिया के राजमहल की दीवारों पर अंकित करते हैं अतः रामायण का यह रूपांतिरत रूप कम्बोडिया की संस्कृति के हर पहलू जैसे लेखन मूर्तिकला, नृत्य, चित्रकला और आर्ट के लगभग सभी पहलुओं को छूता है।

आँकोरवाट के मंदिर की दीवारों पर रामायण के चित्रण की गाथाऐं तराशी गई हैं।मन्दिर में भगवान की मूर्ति पूजा भी की जाती है।

थाईलैंड – (Ramakien) रामकीयन रामायण का यह अनुवाद थाईलैंड में प्रचलित था।Thailand में तो एक राज्य ही अयोध्या के नाम पर था जहाँ के राजा राम कहलाता था।

लाओस- (Laos) phraLak/PhraRam — यह रामायण का लाओस देश का संस्करण है। रामायण लाओस में थाईलैंड और और कम्बोडिया के बाद पहुँची थी।फेरालक (लक्षमन) फ़ेराराम (राम) राम लक्ष्मण की ही कहानी है।

म्यांमार—(Yama Zatdaw) यमज़तदव—रामायण का यह म्यांमार संस्करण है, यह हमारे पड़ोसी देश में पहले यमायाना (Yamayana) नाम से प्रसिध्द था फिर इस पर बौधिक छाप आ गयी।
बर्मा के एक मंदिर न्थलौएंग (nathlaung) में विष्णु मंदिर में रामचंद्र जी और हनुमान जी की पत्थर की मूर्तियाँ हैं।
इसप्रकार हम कह सकते हैं, कि भारतीय संस्कृति ने रामायण महाकाव्य के रूप में दक्षिण एशिया के सभी देशों पर कुछ इस तरह अपनी छाप छोड़ी है।
जैसे—
बुराई पर अच्छाई की जीत, विविधता में एकता, एश्वर्य से बढकर रिश्ते
अच्छी संगत का प्रभाव, सच्ची भक्ति और समर्पितता ,माफ़ी देना बदला
न लेेना, ईश्वर की सच्ची साधना, प्रेम और दया करना
-जैसे भारतीय संस्कृति के अमूल्य नियम जो दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय धरोवर की तरह हैं।
इस तरह इतिहास हमें बहुत कुछ रोचक कहानियाँ बताता हैं।

                                                  

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