ब्याह

 ब्याह

रीना गोयल ….सरस्वतीनगर( हरियाणा)

निपट गंवार था धीरु..बड़े बाप की बिगड़ैल औलादहुकूमत के सिवा सीखा ही नही कुछ..औरत को पांव की जूती समझता  ।सब गांव वालों की आँख में चुभता पर मुखिया के डर से कोई मुह न खोलता..लेकिन आज तो हद हो गयीखेत में सरजू की बिटिया चमकी को अकेला देख खूब मर्दानगी दिखाई उसने…बस पंचायत से ही आस  थी  अब ।घुटनों में सिर दिए चमकी चुचाप कोने में सिसक रही थी…वही तो शिकार थी धीरू की हैवानियत का…बोल सरजू कुछ कहता है मुखिया ने ऊँची आवाज में सरजू को देखकर कहाहुजूर !! आपका ही आसरा है सरजू हाथ जोड़े आंसू बहा रहा था…..चमकी का बाप था जो थापढ़ने में हर बार अव्वल चमकी को किसी तरह दसवी करा पाया था..पर मन में बहुत इच्छा थी बिटिया को  पढ़ाकर कुछ बनाने की..तो फिर धीरू का ब्याह चमकी से तय रहा …!! क्यों पंचो??कहकर पंचायत का फैसला आ गया था …।।

Related post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *