शायर रजनीश संतोष की समय से बातें करती हुईं ग़ज़लें 【आठ बजेंगे】तीनों लोकों में चर्चा है, आठ बजेंगे,आज ये फिर ऐलान हुआ है, ‘आठ बजेंगे’… मुफ़लिस के चौबीसो घंटे आठ बजे हैं,और अब जब तक वो ज़िंदा है, आठ बजेंगे… परबत गुमसुम नादिया है ख़ामोश हवा चुप,सूरज दहशत में बैठा है, आठ बजेंगे… गूंज रही […]Read More
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पटना के शिक्षक विमल कुमार भारती का समकालीन कविता में प्रमुख स्थान है ।हाइकू विधा के भी आप सशस्क्त रचनाकार हैं। मैं सदियों से होमक्वारेंटाइन में हूँ तुम्हें कुछ ही दिनों मेंघुटन होने लगी घर में मेरे निकट रहते होपर जब मेरे साथबाहर निकलते हो, तोकुछ कदम आगेअथवा पीछे चलते होताकि मुझसे तेरी सामाजिक_दूरी बनी […]Read More
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ी लिखीं शाहाना परवीन को कविता,लघुकथा, लेख लिखने में रुचि के साथ एंकरिंग का भी शौक़ है ।वर्तमान में पटियाला में रहती हैं । contact:shahana2020parveen@gmail.com 【तेज़ाब 】 उफ्फ ! नाम लेते ही ऐसा लगाजैसे अंदर तक किसी ने जला दिया होरूह तक काँप जाती हैजब सुनती हूँ इस शब्द कोपर आज […]Read More
[तुम मर तो नहीं सकते हो ] जहां से क्लियर होता है ब्रह्मांड जहां सिर्फ मौत के पौधे उगते हैं आहिस्ता-आहिस्ता वचन को पढ़कर तुम एक देश नहीं बदल सकते मैं जानता हूं काले विचारों से होकर युद्ध करना होगा तुम्हें क्योंकि विचार फक्कड़ है फिर तुम्हें एक विशालकाय बीज से भी मौत के स्वर […]Read More
कोलकता की युवा कवयित्री रचना चौधरी सिर्फ कविताएँ ही नहीं बल्कि कहानी लेखन में भी रुचि रखती हैं।आठ लेखकों द्वारा लिखित साझा उपन्यास ‘ज़िन्दगी है हैंडल हो जाएगी ‘ का सहलेखन और संपादन भी कर चुकी हैं । 【मज़दूर के गर्भ की पीड़ा】 छः माह हुए थे गर्भ में माँ मैं बहुत हुई उत्साहित थी […]Read More
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